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कुंभ में बसेगा कला ग्राम,चौराहों पर कजरी-ठुमरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 06 May 2018 01:06 AM IST
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कुंभ का लोगो जारी करते राज्यपाल राम नाईक व सीएम योगी
- फोटो : amar ujala
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प्रयाग कुंभ को विश्व समुदाय के जेहनोदिल में उतारने के लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में खास कार्ययोजना बनाई है। कुंभ में कला ग्राम बसाया जाएगा। इसमें देश के हर राज्य की कला का समागम होगा। इस कला ग्राम को हस्त शिल्प से लेकर चित्रों और मूर्तियों के गुलदस्ते के रूप में सजाया जाएगा। संगमनगरी के तिराहे, चौराहे नृत्य-संगीत से गुलजार होंगे। हर चौराहे पर लोक और शास्त्रीय विधाओं पर आधारित नृत्य, गायन की प्रस्तुतियां दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को लुभाएंगी।
संगमनगरी में कुंभ के दौरान भारतीय नृत्य, संगीत, कला की विविध शैलियों से जीवंत साक्षात्कार होगा। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक की ओर से इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हस्तियों से संपर्क साधा जा रहा है। कुंभ में इलाहाबाद जंक्शन से लेकर हर चौराहों, तिराहों, ऐतिहासिक भवनों और पुलों को को सजाया जाएगा। पत्थर गिरजा, नए यमुना ब्रिज के अलावा अकबर के किले पर रंग-बिरंगी लतरों से संदेश परक प्रेरक अल्पनाएं सजाई जाएंगी। ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ की तर्ज पर संगीत महोत्सव तो कुंभ में यादगार बनेगा ही, इसके अलावा चौराहों, तिराहों पर लोक नृत्य और गायन की संगीतमय शृंखला श्रद्धालुओं को लुभाएगी। लोक नृत्यों में खास तौर से विलुप्त हो रहे आदिवासी लोक नृत्य करमा, धोबिया, अंगरिया के अलावा ढेंढिया की प्रस्तुतियां होंगी। केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने बताया कि इसके लिए तीन करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। ताकि कुंभ को यादगार बनाया जा सके।
कुंभ को कलाकृतियों, भित्ति चित्रों से सजाने की जिम्मेदारी युवा चित्रकारों को सौंपी जाएगी। इसके लिए बीएचयू, जेएनयू, इलाहाबाद विश्व विद्यालय के अलावा अन्य आर्ट इंस्टीट्यूट के ललित कला, दृश्य कला संकाय के बीएफए, एमएफए के छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया जाएगा। यह युवा चित्रकार म्यूरल आर्ट के अलावा संगमनगरी के ऐतिहासिक स्थलों, विभूतियों पर आधारित पेंटिंग बनाकर शहर को सजाएंगे।
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संगमनगरी में कुंभ के दौरान भारतीय नृत्य, संगीत, कला की विविध शैलियों से जीवंत साक्षात्कार होगा। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक की ओर से इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हस्तियों से संपर्क साधा जा रहा है। कुंभ में इलाहाबाद जंक्शन से लेकर हर चौराहों, तिराहों, ऐतिहासिक भवनों और पुलों को को सजाया जाएगा। पत्थर गिरजा, नए यमुना ब्रिज के अलावा अकबर के किले पर रंग-बिरंगी लतरों से संदेश परक प्रेरक अल्पनाएं सजाई जाएंगी। ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ की तर्ज पर संगीत महोत्सव तो कुंभ में यादगार बनेगा ही, इसके अलावा चौराहों, तिराहों पर लोक नृत्य और गायन की संगीतमय शृंखला श्रद्धालुओं को लुभाएगी। लोक नृत्यों में खास तौर से विलुप्त हो रहे आदिवासी लोक नृत्य करमा, धोबिया, अंगरिया के अलावा ढेंढिया की प्रस्तुतियां होंगी। केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने बताया कि इसके लिए तीन करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। ताकि कुंभ को यादगार बनाया जा सके।
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कुंभ को कलाकृतियों, भित्ति चित्रों से सजाने की जिम्मेदारी युवा चित्रकारों को सौंपी जाएगी। इसके लिए बीएचयू, जेएनयू, इलाहाबाद विश्व विद्यालय के अलावा अन्य आर्ट इंस्टीट्यूट के ललित कला, दृश्य कला संकाय के बीएफए, एमएफए के छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया जाएगा। यह युवा चित्रकार म्यूरल आर्ट के अलावा संगमनगरी के ऐतिहासिक स्थलों, विभूतियों पर आधारित पेंटिंग बनाकर शहर को सजाएंगे।
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