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कुंभ 2019: रोज पूजन से पहले गूंजता है राष्ट्रगान, शहीदों की तस्वीरें रखकर हो रहा शतकुंडीय महायज्ञ
Sat, 26 Jan 2019 04:34 PM IST
shubham
सोनम अग्रहरि, अमर उजाला, प्रयागराज
सोनम अग्रहरि, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: shubham
Updated Sat, 26 Jan 2019 04:34 PM IST
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स्वामी बालक योगेश्वर ‘बद्री महाराज’
कुंभ मेला क्षेत्र में एक शिविर ऐसा भी है, जहां प्रात:पूजन से पहले राष्ट्रगान गूंजता है। सेक्टर चौदह स्थित स्वामी बालक योगेश्वर ‘बद्री महाराज’ के शिविर में देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए शतकुंडीय अतिविष्णु यज्ञ जारी है। यहां शहीदों की तस्वीरें सामने रखकर आहुतियां डाली जाती हैं।
शतकुंडीय महायज्ञ में शहीदों के परिजनों को भी आमंत्रित और सम्मानित किया जाता है। शिविर की विशेषता यह है कि यहां पहले राष्ट्रगान होता है, फिर आरती, पूजन। शिविर में जयहिंद, वंदेमातरम, भारत माता की जय के उद्घोष हमेशा गूंजते हैं।
संयोजक बद्री महाराज कहते हैं, लोग अंगदान , वस्त्रदान, समयदान तो कर सकते हैं पर इन सब से सर्वोपरि प्राणदान है जो सिर्फ और सिर्फ हमारे जवान करते हैं। ऐसे में हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम उनके लिए जो कुछ संभव है, करें।
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इस महायज्ञ की शुरुआत 2003 में की गई थी। 2019 प्रयागराज कुंभ मेला क्षेत्र में 33वां शतकुंडीय अति वष्णु महायज्ञ है। बद्रीनाथ में तपस्या के दौरान कारगिल युद्ध हुआ जिसमें शहीदों और उनके परिवारों के बारे में जानकर मन आहत हुआ। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ही 108 शतकुंडीय अतिविष्णु यज्ञ का संकल्प लिया था जो आज भी जारी है।
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शतकुंडीय महायज्ञ में शहीदों के परिजनों को भी आमंत्रित और सम्मानित किया जाता है। शिविर की विशेषता यह है कि यहां पहले राष्ट्रगान होता है, फिर आरती, पूजन। शिविर में जयहिंद, वंदेमातरम, भारत माता की जय के उद्घोष हमेशा गूंजते हैं।
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संयोजक बद्री महाराज कहते हैं, लोग अंगदान , वस्त्रदान, समयदान तो कर सकते हैं पर इन सब से सर्वोपरि प्राणदान है जो सिर्फ और सिर्फ हमारे जवान करते हैं। ऐसे में हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम उनके लिए जो कुछ संभव है, करें।
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इस महायज्ञ की शुरुआत 2003 में की गई थी। 2019 प्रयागराज कुंभ मेला क्षेत्र में 33वां शतकुंडीय अति वष्णु महायज्ञ है। बद्रीनाथ में तपस्या के दौरान कारगिल युद्ध हुआ जिसमें शहीदों और उनके परिवारों के बारे में जानकर मन आहत हुआ। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ही 108 शतकुंडीय अतिविष्णु यज्ञ का संकल्प लिया था जो आज भी जारी है।