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कुंभ 2019: जीपीएस पर नहीं मिल रही मेला क्षेत्र के शिविरों की लोकेशन, श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी
Sun, 03 Feb 2019 04:15 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 03 Feb 2019 04:15 PM IST
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कुंभ क्षेत्र में स्थापित शिविरों, पुलों, सेक्टरों और मार्गों को जीपीएस से नहीं जोड़े जाने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अपने शिविरों को ढूंढने में खासा परेशानी उठानी पड़ रही है। देश के तमाम शहरों और विदेशों से भी आए श्रद्धालु अपने मोबाइल पर इस उम्मीद से जीपीएस आन करते हैं कि उन्हें अपने शिविर का पता चल जाएगा लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।
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इसी तरह यदि को कुंभ क्षेत्र से अपने शिविर को लोकेशन व्हाट्सएप के जरिए भेजने की कोशिश करता है तो वह भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में हर कोई कई-कई घंटे भटक रहा है। कर्नाटक से आए एम वेंकटेश्वरन ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से मेले को भव्य बनाने की इस बार काफी कवायद की गई है लेकिन मोबाइल के एडवांस तकनीकी युग में यदि जीपीएस सिस्टम के जरिए मेले के शिविरों की लोकेशन भी गुगल से अटैच कर दी जाती तो दुनिया भर से यहां आ रहे करोड़ों लोगों को आसानी हो जाती।
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आईटी सिटी बंगलूरू से आए शिवांस प्रज्ञान ने बतायसा किजीपीएस पर प्रयागराज शहर का पूरा नक्शा मौजूद है। कौन सी गली और कौन से स्थान कहां है, यह आसानी से जीपीएस के जरिए ढूंढा जा सकता है। यहां तक की कुंभ क्षेत्र में स्थायी रूप से बने बड़े हनुुमान जी, किला, शंकर विमान मंडपम, नागवासुकि मंदिर, संगम भी जीपीएस पर है लेकिन अखाड़ों का शिविर कहां, शंकराचार्यों को शिविर कहा है, यह खोज पाना जीपीएस पर संभव नहीं हो रहा है।
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अनिवासी भारतीय प्रेमदत्त जोशी भी मेले में आए हुए हैँ। उन्होंने बताया कि वह पायलट बाबा के आश्रम में जाकर अभी लौटा हूं, काफी देर से भटकने के बाद उनका पता मिल पाया। यदि उनका शिविर जीपीएस पर होता तो उन्हें भटकना नहीं पड़ता। इसी तरह कल्पवासियों के घरों से यहां आने वाले लोगों को भी उनके शिविरों तक पहुंचने में दिक्तत हो रही है। रांची के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्रालॉजी से बीटेक कर रहे छात्र विवेक माधवन ने बताया कि उनके गैं्रड फादर यहां कल्पवास कर रहे हैं, उन तक पहुंचने में काफी मुश्किल आई।