कुंभ 2019: एक ही पांव से चारों धाम,पचास वर्षों से रेती पर राम
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पैदाइशी दिव्यांग बाबा का सिर्फ दायां पैर ही जमीन पर रहता है। बमुश्किल एक फीट तक ही लटका बांया पैर बेमानी है। इसके सहारे के लिए वह बैसाखी लेकर चलते हैं। अब तक पचास बार कल्पवास पूरा कर चुके फलाहारी बाबा रामकिशोर एक पांव से चारों धाम, सारे तीर्थों की यात्रा पूरी कर चुके हैं।
सेक्टर चौदह में ‘दो सोटा, एक बेना’ निशान वाले तीर्थपुरोहित चौबे पंडा के यहां ठौर लिए बाबा अपने बूते ही दूर गंगा तट तक स्नान करने जाते और वहां से हाथ में गंगाजल की बाल्टी लिए लौटते हैं। बिना किसी की मदद नित्यकर्म सहित दूसरे काम करते हैं। जो संकल्प ठान लिया,उसे हंसीखुशी पूरा किया। महंत नृत्यगोपाल दास ने व्हीलचेयर दिलवाई थी, पर कुछ दिनों बाद ही उससे लुढ़क गए तो उसे हटा दिया।
छह वर्ष पर मां नहीं रही और तेरह वर्ष पर पिता चल बसे
‘अमर उजाला’ ने कुरेदा तो बाबा ने आपबीती सुनाई। बोले, इसी रूप में ननिहाल में पैदा हुआ तो मातम छा गया। नानी तो बाहर फेंकने की बात कह रही थीं लेकिन उनकी जेठान ने ईश्वर का अंश मानकर पालने की सलाह दी।
छह वर्ष पर मां नहीं रही और तेरह वर्ष पर पिता चल बसे। कोई सहारा नहीं रहा तो बड़हलगंज स्थित पोहिला गांव में सरयू के किनारे आश्रम बनाए केशवदास महाराज की शरण में जा पहुंचे। गुरु से दीक्षा लेकर जरूरतमंदों को राह दिखाते रहे।
गुरु नहीं रहे तो किचार लौटकर आश्रम बनाया और पास-पड़ोस के लोगों की हर संभव मदद करने में जुट गए। अब तक बाबा जाने कितने दिव्यांगों को जीवन की राह दिखाने सहित बेटियों का ब्याह भी करा चुके हैं।
फिलहाल मध्य सरोवर के बीच श्रद्धालुओं के सहयोग से राधाकृष्ण मंदिर का भव्य मंदिर बन रहा है। बाबा कहते हैं, जरूरतमंदों को मदद और ठौर मिले, यही जीवन का मकसद है। कोई किसी दिव्यांग या मजबूरी में न जीवन से हारे, न लक्ष्य से लौटे।