कुलभाष्कर आश्रम पीजी कॉलेज : मानकों के विपरीत नियुक्ति करने वाले समिति पदाधिकारी और अफसरों पर केस
कुलभाष्कर आश्रम पीजी कॉलेज में वर्ष 2007 से 2012 के बीच प्रयोगशाला सहायकों के सात पदों पर भर्ती होनी थी। उच्च शिक्षा निदेशालय की अनुमति से भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। साथ ही, चयन समिति का गठन किया गया। जांच में पाया गया कि 12 मार्च 2010 और 19 सितंबर 2010 को छपवाए गए विज्ञापन स्पष्ट नहीं थे।
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प्रयागराज के कुलभाष्कर आश्रम पीजी कॉलेज में वर्ष 2007 से 2012 के बीच नियम विरुद्ध तरीके से प्रयोगशाला सहायकों की भर्ती करने के मामले में विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज किया है। शासन ने पिछले वर्ष विजिलेंस को इस प्रकरण की खुली जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने फरवरी, 2023 में शासन को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कॉलेज की प्रबंध समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों और शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधिकारियों को प्रथमदृष्टया दोषी पाते हुए मुकदमा दर्ज कर विवेचना की अनुमति मांगी थी।
शासन की अनुमति मिलने पर विजिलेंस के प्रयागराज सेक्टर ने बुधवार को कॉलेज की प्रबंध समिति के तत्कालीन अध्यक्ष टीपी सिंह, उपाध्यक्ष गोपीकृष्ण श्रीवास्तव, डीआईओएस बृजेश कुमार मिश्रा, कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. एसएन वर्मा, प्रभारी डीआईओएस राजेंद्र प्रसाद, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. दुर्गेश शुक्ला व शिक्षा निदेशालय के डिग्री अनुभाग के प्रधान सहायक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
बताते चलें कि कुलभाष्कर आश्रम पीजी कॉलेज में वर्ष 2007 से 2012 के बीच प्रयोगशाला सहायकों के सात पदों पर भर्ती होनी थी। उच्च शिक्षा निदेशालय की अनुमति से भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। साथ ही, चयन समिति का गठन किया गया। जांच में पाया गया कि 12 मार्च 2010 और 19 सितंबर 2010 को छपवाए गए विज्ञापन स्पष्ट नहीं थे।प्राचार्य ने ऐसे आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया, जिनकी शैक्षिक योग्यता नियमों के मुताबिक नहीं थी।
इसके लिए प्राचार्य डॉ. एसएन वर्मा को दोषी पाया गया। वहीं, चयन समिति में शामिल कॉलेज की प्रबंध समिति के तत्कालीन पदाधिकारी व सरकारी अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन करने और अपने पद का दुरुपयोग करने का दोषी पाया गया। उन्होंने आवश्यक शैक्षिक योग्यता इंटर कृषि न होने के बावजूद प्रयोगशाला सहायक कृषि के पद पर शिवांश श्रीवास्तव, राम सिंह कुशवाहा और अंजनी कुमार त्रिपाठी का चयन का अनुमोदन किया।
प्राचार्य ने निदेशालय भेजी रिपोर्ट
कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज में प्रयोगशाला सहायकाें की नियुक्ति मामले में कॉलेज की ओर से भी जांच आख्या निदेशालय को भेज दी गई है। इसी के साथ फर्जी तरीके से नौकरी पाने के आरोपी तीनों सहायकों को कार्य मुक्त भी किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इस बाबत निदेशालय से पत्र भी आया है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
कुलभास्कर में प्रयोगशाला सहायकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू से ही विवादित रही। उन दिनों उच्च शिक्षा निदेशालय की अनुमति के बाद कॉलेज प्रबंधन के स्तर पर ही तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती की जाती थी। हालांकि चयन समिति में निदेशक के प्रतिनिधि भी होते थे।
इसी के तहत कॉलेज की ओर से प्रयोगशाला सहायकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकालने के साथ आगे की प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन विज्ञापन के ही कई बिंदुओं को लेकर आपत्तियां जताई गईं थीं। अभ्यर्थियों ने शिकायत की थी कि इस पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता को स्पष्ट नहीं किया गया है। इसके बावजूद इसमें सुधार नहीं किया गया।
भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य आवेदकों ने तीन चयनितों की योग्यता पर सवाल उठाते हुए शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि तीन चयनितों के पास इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता ही नहीं है। इस पर जांच शुरू की गई। उच्च शिक्षा के क्षेत्रीय निदेशक समेत कई लोगों के एफआईआर लिखाई गई थी लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब विजिलेंस की ओर से तत्कालीन कॉलेज प्रबंधन, प्राचार्य के साथ अफसरों के खिलाफ एफआईआर लिखाई गई है। इसी क्रम में कॉलेज से भी पूरा विवरण मांगा गया है। प्राचार्य की ओर से भी इस संबंध में पूरी जानकारी निदेशालय भेज दी गई है।