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Achievement : जोश, जज्बा व जुनून संग चक दे इंडिया को तैयार कोहना का लाल, ढोल-बाजे से गांव में मना जश्न

Mon, 07 Oct 2024 03:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 07 Oct 2024 03:16 PM IST
सार

झूंसी के विजय ग्रुप ऑफ हॉकी अकादमी में तकरीबन एक दशक पहले अली खान ने हॉकी खेलने की शुरुआत की थी। तब उसकी उम्र मात्र 10-11 साल रही होगी। अली के पिता रिजवान खान सऊदी अरब में करीब आठ साल से वेल्डर का काम करते हैं।

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Kohna Ka Lal ready to 'Chak De India' with zeal, enthusiasm and passion
अली खान, फुटबॉल खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अगर आप में जोश, जज्बा और कुछ कर गुजरने की लगन है तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से आपको रोक नहीं सकती है। इसे साबित कर दिखाया है झूंसी कोहना गांव के रहने वाले हॉकी खिलाड़ी अली खान ने, जिनका चयन जूनियर हॉकी इंडिया की टीम में बतौर गोलकीपर हुआ है। इससे परिजनों और क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। जानकारी मिलने पर रविवार को परिजनों ने मोहल्ले में ढोल ताशे की धुन पर मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।

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झूंसी के विजय ग्रुप ऑफ हॉकी अकादमी में तकरीबन एक दशक पहले अली खान ने हॉकी खेलने की शुरुआत की थी। तब उसकी उम्र मात्र 10-11 साल रही होगी। अली के पिता रिजवान खान सऊदी अरब में करीब आठ साल से वेल्डर का काम करते हैं। तीन बहनों और दो भाइयों के बीच अली सबसे छोटे हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत, जज्बे और जुनून के बल पर हाॅकी में मुकाम हासिल किया है। गोलकीपर के तौर टीम इंडिया में चयन के लिए वह पिछले एक दशक से मैदान पर रोजाना घंटों पसीना बहाते थे।
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इन दिनों भी वह बंगलुरू में नेशनल कैंप में अभ्यास कर रहे हैं। कैंप में शामिल खिलाड़ियों के बीच से ही अली का चयन किया गया। फोन पर हुई बातचीत के दाैरान अली भावुक हो उठे। उनका कहना है कि मेरी सफलता का पूरा श्रेय अम्मी, अब्बू और कोच विजय सिंह को जाता है। उन्होंने कहा कि मेहनत और बेहतर प्रदर्शन के बल पर अगला लक्ष्य राष्ट्रीय सीनियर हॉकी टीम में चयनित होकर ओलंपिक में खेलना है। अब अली खान मलेशिया में आयोजित होने वाले जोहर कप में भारतीय हॉकी टीम में बतौर गोलकीपर शामिल होंगे।

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हाॅकी खेलना शुरू किया तो स्टिक के भी नहीं थे पैसे

तकरीबन एक दशक पहले सन 2013 में अली खान हॉकी के खेल में कुछ कर गुजरने का सपना लेकर पीडीए के त्रिवेणीपुरम मैदान पर हॉकी कोच विजय सिंह के पास पहुंचा था। तब उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह हॉकी की स्टिक खरीद सके, लेकिन कोच विजय ने किशोरवस्था में ही उसकी आंखों में पल रहे सपने को पहचाना और उसे तराशने का निर्णय लिया।

फिर अपने पैसे से अली खान को हॉकी खरीदकर दी। फिर उन्होंने हॉकी गोलकीपर की पूरी कीट मुहैया कराई थी। मां शबीना बेगम ने बताया कि बेटे ने इस दिन के लिए कड़ी मेहनत की है। बहन दरक्शा, हुमैरा और अक्सा ने बताया कि भाई अली के टीम इंडिया में चयन से वह बेहद खुश हैं। बड़े भाई फैजान खान भी अली की सफलता पर फूले नहीं समा रहे थे।

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