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आयात नीति समेत अन्य मुद्दों को लेकर किसानों का हल्ला बोल नौ को
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kisan andolan in prayagraj
- फोटो : CITY DESK
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अनाज, दलहन, तिलहन, आलू, प्याज को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर करने का विरोध
प्रयागराज। आलू, मक्का समेत अन्य फसलों की आयात नीति समेत दूसरे मुद्दों को लेकर किसानों का बड़ा वर्ग विरोध में आ गया है। जून में पारित तीन अध्यादेश को लेकर किसानों में ज्यादा गुस्सा है। इस अध्यादेश में कई फसलों को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर किए जाने तथा कारपोरेट घरानों के हाथ में खेती चले जाने की बात करते हुए उन्होंने बड़े आंदोलन की तैयारी की है। इसी क्रम में देश भर के 260 संगठनों ने संयुक्त रूप से नौ अगस्त को ‘कारपोरेट भगाओ किसानी बचाओ’ आंदोलन की घोषणा की है।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के महासचिव डॉ.आशीष मित्तल का कहना है कि सरकार ने जून में तीन अध्यादेश पारित किए हैं, जो किसानों एवं खेत मजदूरों के विरुद्ध हैं। इनमें अनाज, दलहन, तिलहन, आलू व प्याज को आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा विदेशी कंपनियों का खेती में हस्तक्षेप बढ़ा दिया गया है। इसके तहत किसान कंपनियों से जीएम बीज तथा अन्य सामान खरीदने के लिए बाध्य होंगे।
इससे जमाखोरी, कालाबाजारी समेत कई समस्याएं खड़ी होंगी। राजकुमार पथिक का कहना है कि खपत कम होने की वजह से यहां दूध के कारोबारी बेहाल हैं। उन्हें अच्छी कीमत नहीं मिल रही। इसके विपरीत सरकार अधिक मूल्य पर दूध पाउडर आयात कर रही है। आलू के किसान भी इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं। किसान नेताओं ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा तथा आंदोलन की घोषणा की।
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प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा
-एआईकेएससीसी की ओर से ‘कारपोरेट भगाओ किसानी बचाओ’ आंदोलन को सफल बनाने के लिए जागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में संगठन की ओर से बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। अलग-अलग यूनियन के प्रतिनिधियों ने कलक्ट्रेट के अलावा सांसद रेवती रमण सिंह, डॉ.रीता जोशी बहुगुणा और केशरी देवी पटेल के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें उन्होंने अपील की है कि किसान हित को ऊपर रखा जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ.आशीष मितल, किसान पार्टी (लोकतांत्रिक) के डॉ.बीएल वर्मा, शमशुल जमा, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन के घनश्याम, फूलचंद्र निषाद, सुरेश निषाद, रिजवान अहमद, वीरेंद्र कुमार पटेल, संजीव कुमार सरोज आदि शामिल रहे।
आंदोलन को ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन
‘कारपोरेट भगाओ किसानी बचाओ’ आंदोलन का ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन किया है। निजीकरण, कारपोरेट कर्ज माफ किए जाने आदि मुद्दों को लेकर उन्होंने आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की है। सीआईटीयू के अविनाश मिश्रा ने बताया कि प्रयागराज में गांधी स्मारक पर धरना आयोजित होगा।
दूध का उचित मूल्य तय हो
सपा के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह ने दूध का उचित मूल्य तय करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि भारत में सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला राज्य उत्तर प्रदेश है लेकिन लागत की अपेक्षा दाम कम होने के कारण पशुपालकों को काफी परेशानी होती हैं। उन्होंने पशुपालकों की मेहनत और खर्च को देखते हुए दूध का उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग की।
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प्रयागराज। आलू, मक्का समेत अन्य फसलों की आयात नीति समेत दूसरे मुद्दों को लेकर किसानों का बड़ा वर्ग विरोध में आ गया है। जून में पारित तीन अध्यादेश को लेकर किसानों में ज्यादा गुस्सा है। इस अध्यादेश में कई फसलों को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर किए जाने तथा कारपोरेट घरानों के हाथ में खेती चले जाने की बात करते हुए उन्होंने बड़े आंदोलन की तैयारी की है। इसी क्रम में देश भर के 260 संगठनों ने संयुक्त रूप से नौ अगस्त को ‘कारपोरेट भगाओ किसानी बचाओ’ आंदोलन की घोषणा की है।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के महासचिव डॉ.आशीष मित्तल का कहना है कि सरकार ने जून में तीन अध्यादेश पारित किए हैं, जो किसानों एवं खेत मजदूरों के विरुद्ध हैं। इनमें अनाज, दलहन, तिलहन, आलू व प्याज को आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा विदेशी कंपनियों का खेती में हस्तक्षेप बढ़ा दिया गया है। इसके तहत किसान कंपनियों से जीएम बीज तथा अन्य सामान खरीदने के लिए बाध्य होंगे।
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इससे जमाखोरी, कालाबाजारी समेत कई समस्याएं खड़ी होंगी। राजकुमार पथिक का कहना है कि खपत कम होने की वजह से यहां दूध के कारोबारी बेहाल हैं। उन्हें अच्छी कीमत नहीं मिल रही। इसके विपरीत सरकार अधिक मूल्य पर दूध पाउडर आयात कर रही है। आलू के किसान भी इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं। किसान नेताओं ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा तथा आंदोलन की घोषणा की।
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प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा
-एआईकेएससीसी की ओर से ‘कारपोरेट भगाओ किसानी बचाओ’ आंदोलन को सफल बनाने के लिए जागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में संगठन की ओर से बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। अलग-अलग यूनियन के प्रतिनिधियों ने कलक्ट्रेट के अलावा सांसद रेवती रमण सिंह, डॉ.रीता जोशी बहुगुणा और केशरी देवी पटेल के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें उन्होंने अपील की है कि किसान हित को ऊपर रखा जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ.आशीष मितल, किसान पार्टी (लोकतांत्रिक) के डॉ.बीएल वर्मा, शमशुल जमा, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन के घनश्याम, फूलचंद्र निषाद, सुरेश निषाद, रिजवान अहमद, वीरेंद्र कुमार पटेल, संजीव कुमार सरोज आदि शामिल रहे।
आंदोलन को ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन
‘कारपोरेट भगाओ किसानी बचाओ’ आंदोलन का ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन किया है। निजीकरण, कारपोरेट कर्ज माफ किए जाने आदि मुद्दों को लेकर उन्होंने आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की है। सीआईटीयू के अविनाश मिश्रा ने बताया कि प्रयागराज में गांधी स्मारक पर धरना आयोजित होगा।
दूध का उचित मूल्य तय हो
सपा के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह ने दूध का उचित मूल्य तय करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि भारत में सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला राज्य उत्तर प्रदेश है लेकिन लागत की अपेक्षा दाम कम होने के कारण पशुपालकों को काफी परेशानी होती हैं। उन्होंने पशुपालकों की मेहनत और खर्च को देखते हुए दूध का उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग की।