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माघ मेले में संगम पर कल्पवासियों-संतों को मिलेगी निर्मल गंगा

Tue, 08 Dec 2020 12:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 08 Dec 2020 12:22 AM IST
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Kalpavasi-saints will get clean Ganga at the confluence of Magh Mela
prayagraj news : गंगा में तेजी से हो रहा है कटान। - फोटो : prayagraj

माघ मेले में इस बार कल्पवालियों और साधु-संतों को निर्मल गंगा की धारा संगम पर डुबकी लगाने के लिए मिलेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तराखंड सरकार को भेजे गए प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। सात हजार क्यूसेक जल भीमगोड़ा और नरोरा बांधों से पूरे महीने भर छोड़ा जाता रहेगा, ताकि संगम पर न्यूनतम पराह बने रहने के साथ ही संतों-श्रद्धालुओं को निर्मल दल धारा प्राप्त हो सके। इसके अलावा टेनरियों व अन्य कारखानों से गंगा में आने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए भी कड़ी हिदायत दी गई है।

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Kalpavasi-saints will get clean Ganga at the confluence of Magh Mela
prayagraj news : गंगा में तेजी से हो रहा है कटान। - फोटो : prayagraj

माघ मेले में आने वाले पांच लाख से अधिक कल्पवासियों व संतों, श्रद्धालुओं के लिए गंगा का निर्मल जल उपलब्ध कराने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से उत्तराखंड शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। सिंचाई विभाग के एक अफसर ने यह जानकारी दी। बताया कि इस प्रस्ताव के तहत सात हजार क्यूसेक जल लगातार माघ मेला होने तक गंगा में छोड़े जाने की सहमति बन गई है। पहला मुख्य स्नान मकर संक्रांति पर 14 जनवरी को होगा।

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Kalpavasi-saints will get clean Ganga at the confluence of Magh Mela
prayagraj news : गंगा में तेजी से हो रहा है कटान। - फोटो : prayagraj
इससे पहले संगम पर निर्मल गंगा की धारा की प्रवाह संतों-भक्तों को मिलने लगेगा। इस बार माघ मेले में मकर संक्रांति के बाद 28 जनवरी को पौष पूर्णिमा, 11 फरवरी को मौनी अमावस्या, 16 फरवरी को वसंत पंचमी, 27 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 11 मार्च 2021 को महाशिवरात्रि का स्नान पर्व होगा। इसके लिए सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की ओर से रिवर ड्रेजिंग के अलावा जेटी का निर्माण कराने के साथ ही गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जल की गुणवत्ता की मानिटरिंग शुरू कर दी गई है। निर्मल गंगा धारा के तहत गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को 40 सीवर लाइन वाले नालों की टैपिंग निर्देश दिए गए हैं।
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