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Jyotish Mahakumbh: 'ग्रहों की स्थिति व्यक्ति और उसके जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है', मंत्री नंदी ने कही ये बात
Sat, 25 Jan 2025 10:56 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 25 Jan 2025 10:56 AM IST
सार
मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने अपने भाषण में कहा कि अमर उजाला को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएं। भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति दुनिया में सबसे प्राचीनतम है।
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Jyotish Mahakumbh
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखने वालों के लिए इंतजार की घड़ी खत्म हो गई है। प्रयागराज में 'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' हो रहा है। अमर उजाला और उससे जुड़े उपक्रम जीवांजलि और माय ज्योतिष की ओर से हो रहे इस महोत्सव में ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञ जुटे हैं। अलग-अलग विषयों पर विचार विमर्श होगा।
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महोत्सव में ज्योतिष शास्त्र व गूढ़ रहस्यों के साथ-साथ वैदिक ज्योतिष, मंत्रों का महत्व, टैरो कार्ड और आधुनिकता में छिपे ज्योतिष के प्राचीन रहस्य जैसे विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने दीप प्रज्वलन कर किया। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कार्यक्रम का सपामन करेंगे।
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इस दौरान मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने अपने भाषण में कहा कि अमर उजाला को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएं। भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति दुनिया में सबसे प्राचीनतम है। हमारे शास्त्रों ने हमें वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद जैसे अनेक बहुमूल्य उपहार दिए हैं। ज्योतिष शास्त्र इनमें सबसे महत्वपूर्ण है।
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सनातन धर्म में मुहूर्त का बड़ा ही महत्व है। हमारे यहां कहा गया है- माघ मकर गत रवि जब होई, तीरथ पतिहिं आव सब कोई। ...ग्रहों की स्थिति व्यक्ति और उसके जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। यह प्रामाणिक बात है। इसलिए ज्योतिष को ज्योतिष विज्ञान भी कहा जाता है।
'ज्योतिष ने ही महाकुंभ में 144 साल बाद बने योग के बारे में बताया'
ज्योतिष ने ही हमें बताया है कि इस बार महाकुंभ पर जो योग बना है, वह 144 साल बाद आया है। 2019 में जब कुंभ हुआ था, तो 24 करोड़ लोग यहां आए थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस बार यहां महाकुंभ हो रहा है। हाल ही में मेरी मोरारी बापू जी से यह चर्चा हुई कि लोग महाकुंभ में डुबकी लगाने आते हैं, लेकिन इतने संत भी यहां आते हैं, लोगों को उनके चरणों की धूल भी साथ लेकर जानी चाहिए। मोरारी बापू जी ने कहा कि गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर। ...यानी महापुरुषों के चरणों की धूल लेकर जाना चाहिए। अब तक 11 करोड़ लोग महाकुंभ में आकर स्नान कर चुके हैं।
ज्योतिष ने ही हमें बताया है कि इस बार महाकुंभ पर जो योग बना है, वह 144 साल बाद आया है। 2019 में जब कुंभ हुआ था, तो 24 करोड़ लोग यहां आए थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस बार यहां महाकुंभ हो रहा है। हाल ही में मेरी मोरारी बापू जी से यह चर्चा हुई कि लोग महाकुंभ में डुबकी लगाने आते हैं, लेकिन इतने संत भी यहां आते हैं, लोगों को उनके चरणों की धूल भी साथ लेकर जानी चाहिए। मोरारी बापू जी ने कहा कि गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर। ...यानी महापुरुषों के चरणों की धूल लेकर जाना चाहिए। अब तक 11 करोड़ लोग महाकुंभ में आकर स्नान कर चुके हैं।
'ज्योतिष में समाधान मौजूद हैं'
ज्योतिष शास्त्र के बारे में मंत्री नंदी ने कहा कि कुछ लोग अपने-अपने तर्क देते हैं, लेकिन मेरा निजी अनुभव अच्छा रहा है। मेरे सामने कई संकट आए, लेकिन एक ज्योतिषी ने मेरे बारे में जो भविष्यवाणी की थी, वो सही साबित हुई। ज्योतिष की सबसे सुंदर बात है कि अगर कोई दोष है या ग्रहों की दिशा विपरीत है तो उसका समाधान भी मौजूद है। जैसे डॉक्टर दवा देता है, वैसे ही ज्योतिषाचार्य भी ग्रहों की दशा के हिसाब से निदान बताते हैं। जब रामलला के लिए भव्य-दिव्य मंदिर बना, तब काल गणना के अनुसार मुहूर्त निकालकर ही मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।
ज्योतिष शास्त्र के बारे में मंत्री नंदी ने कहा कि कुछ लोग अपने-अपने तर्क देते हैं, लेकिन मेरा निजी अनुभव अच्छा रहा है। मेरे सामने कई संकट आए, लेकिन एक ज्योतिषी ने मेरे बारे में जो भविष्यवाणी की थी, वो सही साबित हुई। ज्योतिष की सबसे सुंदर बात है कि अगर कोई दोष है या ग्रहों की दिशा विपरीत है तो उसका समाधान भी मौजूद है। जैसे डॉक्टर दवा देता है, वैसे ही ज्योतिषाचार्य भी ग्रहों की दशा के हिसाब से निदान बताते हैं। जब रामलला के लिए भव्य-दिव्य मंदिर बना, तब काल गणना के अनुसार मुहूर्त निकालकर ही मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।