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Prayagraj News: 27 सितंबर को पदोन्नति परीक्षा में शामिल हो सकेंगे न्यायिक अधिकारी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नति के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक न्यायिक अधिकारियों को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि चार जुलाई 2025 तक पांच साल की अर्हता सेवा पूरी करने वाले याचियों को 27 सितंबर को होने वाली परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। हालांकि, परीक्षा में शामिल होने मात्र से अभ्यर्थियों के पक्ष में कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने आशुतोष तिवारी और 39 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचियों का कहना था कि चार जुलाई 2025 को नियमों में संशोधन के समय वे पांच साल की अर्हता सेवा पूरी कर चुके थे।
इसके बावजूद 31 दिसंबर 2024 की कटऑफ डेट निर्धारित किए जाने से वे पदोन्नति परीक्षा में शामिल होने के लिए अयोग्य हो गए। उनका तर्क था कि संशोधित नियम लागू होने से पहले की तारीख से अर्हता सेवा की गणना करना उचित नहीं है।
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वहीं, हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया के लिए कटऑफ डेट निर्धारित करने का निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया गया था। इसे बदलने से पहले से चल रही प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। परीक्षा 27 सितंबर को प्रस्तावित है।
खंडपीठ ने कहा कि मामले में कानून के जटिल प्रश्न शामिल हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले अंतरिम व्यवस्था के तहत पात्र याचियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है। अगली सुनवाई नौ अक्तूबर को होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने आशुतोष तिवारी और 39 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचियों का कहना था कि चार जुलाई 2025 को नियमों में संशोधन के समय वे पांच साल की अर्हता सेवा पूरी कर चुके थे।
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इसके बावजूद 31 दिसंबर 2024 की कटऑफ डेट निर्धारित किए जाने से वे पदोन्नति परीक्षा में शामिल होने के लिए अयोग्य हो गए। उनका तर्क था कि संशोधित नियम लागू होने से पहले की तारीख से अर्हता सेवा की गणना करना उचित नहीं है।
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वहीं, हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया के लिए कटऑफ डेट निर्धारित करने का निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया गया था। इसे बदलने से पहले से चल रही प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। परीक्षा 27 सितंबर को प्रस्तावित है।
खंडपीठ ने कहा कि मामले में कानून के जटिल प्रश्न शामिल हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले अंतरिम व्यवस्था के तहत पात्र याचियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है। अगली सुनवाई नौ अक्तूबर को होगी।