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जेआरएफ अभ्यर्थियों के लिए बढ़ेगी मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Mon, 17 Apr 2017 01:14 AM IST
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इलाहाबाद
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जेआरएफ अभ्यर्थियों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। हर विषय में जेआरएफ वालों की लंबी कतार है और सभी डीफिल में प्रवेश लेना चाहते हैं लेकिन विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी के चलते नए सत्र में डीफिल की सीट कम हो सकती है। विवि की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए 21 अप्रैल से आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है लेकिन क्रेट में अब तक सीटों का निर्धारण नहीं हो सका है।
दरअसल, पहले रिटायर टीचर भी छात्रों को शोध करा सकते थे लेकिन इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और रिटायर टीचरों के रिसर्च स्कॉलर्स नियमित शिक्षकों के पास शिफ्ट कर दिए गए। शिक्षकों के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या में शोध छात्र थे और नए रिसर्च स्कॉलर्स के आने के बाद शिक्षकों का काम और बढ़ गया है।
इसके अलावा इस सत्र में 14 शिक्षक रिटायर हो रहे हैं। उनके रिसर्च स्कॉलर भी दूसरे शिक्षकों के पास शिफ्ट कर दिए जाएंगे। ऐसे में क्रेट के जरिये शोध की तैयारी में बैठे छात्रों को झटका लग सकता है। इनमें बड़ी संख्या जेआरएफ अभ्यर्थियों की है। कुछ विभागों तो शिक्षकों की संख्या इतनी कम है कि वहां सत्र शून्य हो सकता है। हालांकि आने वाले समय में सुधार की गुंजाइश है, क्योंकि इविवि में शिक्षकों के 517 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शिक्षक की संख्या बढ़ने के बाद छात्रों को शोध के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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दरअसल, पहले रिटायर टीचर भी छात्रों को शोध करा सकते थे लेकिन इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और रिटायर टीचरों के रिसर्च स्कॉलर्स नियमित शिक्षकों के पास शिफ्ट कर दिए गए। शिक्षकों के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या में शोध छात्र थे और नए रिसर्च स्कॉलर्स के आने के बाद शिक्षकों का काम और बढ़ गया है।
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इसके अलावा इस सत्र में 14 शिक्षक रिटायर हो रहे हैं। उनके रिसर्च स्कॉलर भी दूसरे शिक्षकों के पास शिफ्ट कर दिए जाएंगे। ऐसे में क्रेट के जरिये शोध की तैयारी में बैठे छात्रों को झटका लग सकता है। इनमें बड़ी संख्या जेआरएफ अभ्यर्थियों की है। कुछ विभागों तो शिक्षकों की संख्या इतनी कम है कि वहां सत्र शून्य हो सकता है। हालांकि आने वाले समय में सुधार की गुंजाइश है, क्योंकि इविवि में शिक्षकों के 517 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शिक्षक की संख्या बढ़ने के बाद छात्रों को शोध के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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