Prayagraj : करोड़ों की लागत से बने फाफामऊ सेतु के ज्वाइंट एक्सपेंशन डेढ़ वर्ष में ही टूटकर बेकार
गंगा पर निर्मित करीब 33 साल पुराने चंद्रशेखर आजाद सेतु के नवीनीकरण का काम डेढ़ वर्ष पहले ही कराया गया था। तब एनएच खंड के अफसरों ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि इस सेतु की मरम्मत के बाद इसकी उम्र 50 वर्ष बढ़ जाएगी।
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फाफामऊ में गंगा पर निर्मित चंद्रशेखर आजाद सेतु करोड़ों रुपये की लागत से पुनरोद्धार के डेढ़ वर्ष में ही क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके सात ज्वाइंट एक्सपेंशन फिर टूट गए हैं। बेयरिंग खिसकने की भीत कही जा रही है। अगर ध्यान नहीं दिया गया तो भारी वाहनों के दबाव से सेतु और भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। ऐसे इस पुल के कायाकल्प का फिर काम शुरू कराने की तैयारी है।
गंगा पर निर्मित करीब 33 साल पुराने चंद्रशेखर आजाद सेतु के नवीनीकरण का काम डेढ़ वर्ष पहले ही कराया गया था। तब एनएच खंड के अफसरों ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि इस सेतु की मरम्मत के बाद इसकी उम्र 50 वर्ष बढ़ जाएगी। लेकिन, सबकुछ उल्टा निकल गया। इस सेतु के नवीनीकरण की तकनीक पर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि किस तरह और कैसे ज्वाइंट एक्सपेंशन लगाए गए थे कि इतनी जल्दी दोबारा क्षतिग्रस्त हो गए।
इस सेतु की तब बेयरिंग भी कई जगह बदली गई थी। इसके अलावा रेलिंग पोस्ट नए सिरे से बनवाई गई थी। इस बार महीने भर से ज्वाइंट एक्सपेंशन टूटने की बात आ रही है, लेकिन एनएच खंड के अफसर इसे नजर अंदाज करते जा रहे हैं। ऐसे में ज्वाइंट एक्सटेंशन की मरम्मत को टालना खतरे से खाली नहीं माना जा रहा है।
ज्वाइंट और बेयरिंग की मरम्मत न होने की वजह से इस पुल को और नुकसान पहुंचने की आशंका है। भारी वाहनों के लगातार आवागमन से इस पर दबाव बढ़ता जा रहा है। महाकुंभ का आयोजन भी आने वाला है। ऐसे में इस पुल की बिना देरी किए मरम्मत की प्रक्रिया शुरू कराने की बात कही जा रही है। शहर से फाफामऊ को जोड़ने वाले इस चंद्रशेखर आजाद सेतु का निर्माण 1988 में कराया गया था।
35 साल पुराने पुल के ज्वाइंट एक्सपेंशन वर्ष भर के भीतर फिर टूटने से लोग परेशान
1098 मीटर है फाफामऊ के चंद्रशेखर आजाद सेतु की लंबाई
07 जगहों पर ज्वाइंट एक्सपेंशन टूटने से बढ़ी चिंता
18 महीने पहले ही आजाद सेतु का एनएच खंड ने कराया था नवीनकरण
फाफामऊ पुल के टूटे ज्वाइंट एक्सपेंशन और खिसकी बेयरिंग की मरम्मत जल्द करा दी जाएगी। एक वर्ष पहले ही इस सेतु का नवीनीकरण कराया गया था, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। इस सेतु पर कब और क्या काम कराया गया था, इसकी पत्रावली देखकर ही कुछ कह पाऊंगा। - आरपी सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी- एनएच खंड