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जितना गंभीर मरीज, उतना अधिक कमीशन
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 10 Dec 2014 11:45 PM IST
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शहर से लेकर देहात तक सक्रिय झोलाछाप डॉक्टराें के लिए शहर के कई नर्सिंगहोम मोटी कमाई का जरिया बने हैं। झोलाछाप डॉक्टर इन नर्सिंगहोम में गंभीर मरीजों को रेफर कर देते हैं और इसके एवज में नर्सिंगहोम संचालक उन्हें मोटा कमीशन देते हैं। सूत्रों की मानें तो यमुनापार के चाका, करछना, मेजा, जारी, कोरांव, लेड़ियारी, लोहगरा, जसरा, शंकरगढ़ जैसे इलाकों में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टर शहर के अलोपीबाग, कीडगंज, बैरहना, बाई का बाग, तुलाराम बाग, सोहबतियाबाग, बैरहना में संचालित कुछ चुनिंदा नर्सिंगहोम में मरीज भेजे जा रहे हैं। जबकि गंगापार के हंडिया, मऊआइमा, सोरांव, फूलपुर, जैसे इलाकों के झोलाछाप शहर के अल्लापुर, तेलियरगंज, कटरा, सिविल लाइंस, कर्नलगंज, लाउदर रोड, एलनगंज में स्थित नर्सिंगहोम में मरीज भेज रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो सामान्य मरीजों को भेजने पर झोलाछाप डॉक्टरों की कमाई कुछ कम ही होती है। झोलाछाप डॉक्टरों को कमीशन हरेक मरीज के बजाए माह में दो बार या एक बार एकमुश्त मिलता है। लेनदेन में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए कई संचालकों ने बाकायदा कम्प्यूटराइज्ड डाटा तक बना रखा है जबकि कई संचालकों ने सामान्य रजिस्टर खोल रखे हैं
देहात क्षेत्र में सक्रिय जैसी सामान्य बीमारी को भी गंभीर बताकर मरीज को नर्सिंगहोम भेज देते हैं। पिछले दिनों का ही वाकया है कि सोरांव क्षेत्र के एक झोलाछाप ने बुखार से पीड़ित एक मरीज को डेंगू से ग्रसित बताते हुए सिविल लाइंस स्थित एक नामीगिरामी नर्सिंगहोम में भेज दिया। डॉक्टरों ने डेंगू का इलाज भी कर दिया। इलाज के एवज में मरीज से 25 हजार रुपये वसूल लिए। लेकिन जब परिजनों ने बेली अस्पताल में जाकर जांच करायी तो पता चला कि मरीज को डेंगू के बजाए सामान्य बुखार था।
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कमीशनबाजी को लेकर कई नर्सिंगहोम संचालक और झोलाछाप डॉक्टराें के बीच कई बार मारपीट की भी घटनाएं भी हो चुकी हैं। प्रकरण उजागर होने के बाद मरीजों-तीमारदारों ने भी झोलाछाप डॉक्टरों की जमकर खबर ली थी। कमीशनबाजी को लेकर हुई कहासुनी के बाद कई झोलाछाप डॉक्टराें ने नर्सिंगहोम से नाता ही तोड़ लिया।
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सूत्रों की मानें तो सामान्य मरीजों को भेजने पर झोलाछाप डॉक्टरों की कमाई कुछ कम ही होती है। झोलाछाप डॉक्टरों को कमीशन हरेक मरीज के बजाए माह में दो बार या एक बार एकमुश्त मिलता है। लेनदेन में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए कई संचालकों ने बाकायदा कम्प्यूटराइज्ड डाटा तक बना रखा है जबकि कई संचालकों ने सामान्य रजिस्टर खोल रखे हैं
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देहात क्षेत्र में सक्रिय जैसी सामान्य बीमारी को भी गंभीर बताकर मरीज को नर्सिंगहोम भेज देते हैं। पिछले दिनों का ही वाकया है कि सोरांव क्षेत्र के एक झोलाछाप ने बुखार से पीड़ित एक मरीज को डेंगू से ग्रसित बताते हुए सिविल लाइंस स्थित एक नामीगिरामी नर्सिंगहोम में भेज दिया। डॉक्टरों ने डेंगू का इलाज भी कर दिया। इलाज के एवज में मरीज से 25 हजार रुपये वसूल लिए। लेकिन जब परिजनों ने बेली अस्पताल में जाकर जांच करायी तो पता चला कि मरीज को डेंगू के बजाए सामान्य बुखार था।
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कमीशनबाजी को लेकर कई नर्सिंगहोम संचालक और झोलाछाप डॉक्टराें के बीच कई बार मारपीट की भी घटनाएं भी हो चुकी हैं। प्रकरण उजागर होने के बाद मरीजों-तीमारदारों ने भी झोलाछाप डॉक्टरों की जमकर खबर ली थी। कमीशनबाजी को लेकर हुई कहासुनी के बाद कई झोलाछाप डॉक्टराें ने नर्सिंगहोम से नाता ही तोड़ लिया।