Prayagraj News: एसबीआई की तिजोरी में बंद हैं रानी बेतिया के 200 करोड़ से ज्यादा के जेवरात
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की त्रिवेणी शाखा में रखी बेतिया राज की रानी जानकी कुंवर की तिजोरी में कई राज हैं। इसमें ऐतिहासिक दस्तावेजों के अलावा 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के हीरे और सोने के जेवरात भी हैं।
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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की त्रिवेणी शाखा में रखी बेतिया राज की रानी जानकी कुंवर की तिजोरी में कई राज हैं। इसमें ऐतिहासिक दस्तावेजों के अलावा 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के हीरे और सोने के जेवरात भी हैं। बिहार सरकार की ओर से अब इस तिजोरी को खुलवाने की तैयारी की गई है। एक महीने में तिजोरी खोले जाने की उम्मीद है।
बिहार सरकार बेतिया राज के आखिरी राजा हरेंद्र किशोर सिंह व उनकी पत्नी जानकी कुंवर की संपत्ति अपने कब्जे में लेने जा रही है। सभी तरह की संपत्तियां खंगाली जा रही हैं। रानी जानकी कुंवर अपने आखिरी समय में प्रयागराज में ही रहीं। ऐसे में उनकी तिजोरी एसबीआई की शाखा में भी रखी हुई है।
कलक्ट्रेट में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इस तिजोरी में बड़े आकार के कई हीरे हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में सोना भी रखा हुआ है। आजादी से पहले इस तिजोरी में रखे गहनों की उस समय करीब साढ़े पांच लाख रुपये कीमत आंकी गई थी। हालांकि, अब इसकी कीमत 200 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा इसमें कई ऐतिहासिक दस्तावेज होने की भी उम्मीद है।
बिहार सरकार अब इस तिजोरी को भी अपने कब्जे में लेने जा रही है। इसमें रखे जेवरात बिहार के संग्रहालय में रखे जाएंगे। हालांकि, बैंक अफसरों ने इस बारे में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। वहीं, सीआरओ कुंवर पंकज का कहना है कि एसबीआई की शाखा में एक आलमारी है। अन्य संपत्तियों के सर्वे और उन्हें सूचीबद्ध करने के बाद तिजोरी भी खुलवाई जाएगी। आलमारी में क्या है यह उसके खुलने के बाद ही पता चल पाएगा।
स्ट्रैची रोड स्थित भवन में ही हुआ था रानी का निधन
बेतिया राज के आखिरी राजा हरेंद्र किशोर सिंह की दो पत्नी रतन कुंवर और जानकी कुंवर थीं। हालांकि, दूसरी पत्नी जानकी कुंवर से शादी के 22 दिन बाद ही राजा हरेंद्र किशोर सिंह का 26 मार्च 1893 को निधन हो गया। इनके बाद उनकी पहली पत्नी रतन कुंवर ने राजभार संभाला लेकिन 24 मार्च 1896 को उनकी भी मृत्यु हो गई। इनके बाद दूसरी पत्नी जानकी कुंवर ने इस साम्राज्य को संभाला लेकिन अंग्रेज सरकार ने इन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। इसी के साथ पूरी संपत्ति बिहार सरकार के बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के कोर्ट ऑफ कवर के अंतर्गत कर दी गई। इसके बाद रानी जानकी कुंवर प्रयागराज (इलाहाबाद) आ गईं और सिविल लाइंस स्थित स्ट्रैची रोड पर स्थित महल में रहने लगीं। बिहार सरकार के दस्तावेज के अनुसार रानी जानकी कुंवर का इसी भवन में 24 नवंबर 1954 को निधन हो गया।