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एक अक्षर की गलती से आठ माह अधिक काटनी पड़ी जेल, हाईकोर्ट ने जेलर को तलब कर दी चेतावनी

Sun, 20 Dec 2020 10:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 20 Dec 2020 10:32 PM IST
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Jail had to be cut for more than eight months due to one letter mistake, the High Court summoned the jailor
जेल में बंद कैदी (प्रतीकात्मक) - फोटो : social media
जमानत आदेश और रिहाई आदेश में एक अक्षर की गलती से आरोपी को जमानत मिलने के बाद भी आठ महीने अधिक जेल में बिताने पड़े। जेलर ने याची को इस तकनीकी खामी के कारण रिहा करने से मना कर दिया। इस पर हाई कोर्ट ने जेलर को फटकार लगाते हुए चेतावनी दी है। जमानत आदेश में नाम के बीच का अक्षर कुमार न जुडे़ होने के कारण जेल अधीक्षक ने जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट के आदेश पर हाजिर सिद्धार्थनगर के जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि अभियुक्त को 8 दिसंबर 20 को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। 
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यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने विनोद बरूआर की अर्जी पर दिया है। सत्र न्यायालय ने जमानत अर्जी 4 सितंबर 19 को निरस्त कर दी थी, जिसपर हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी और हाईकोर्ट से 9 अप्रैल 20 को जमानत मंजूर कर ली गई।
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जमानत पर छोड़ने के आदेश में विनोद बरूआर लिखा था और रिमांड आदेश में विनोद कुमार बरूआर था। इस पर याची ने आदेश संशोधित करने की अर्जी दाखिल की। तकनीकी खामी के चलते अभियुक्त को न छोड़ने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया और जेलर  को तलब कर चेतावनी दी।
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