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इविवि में आमरण अनशन जारी, कई की हालत गंभीर

Mon, 09 May 2016 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 09 May 2016 01:57 AM IST
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Ivivi fast unto death in the release, many in critical condition
इलाहाबाद व‌िश्वव‌िद्यालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू समेत अन्य छात्रों का आमरण अनशन पांचवें दिन रविवार को भी जारी रहा। ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर देर रात पहुंची पुलिस छात्रनेता मानस शर्मा को उठा ले गई। उसे एसआरएन में भर्ती कराया गया है। हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है। उसका शुगर लेवल 20 से नीचे आ गया था।
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अनशन पर बैठे अजीत यादव विधायक, विक्रांत सिंह की हालत भी काफी बिगड़ गई है। विक्रांत का ब्लड प्रेशर 50 और 90 तक पहुंच गया है। ऋचा सिंह तथा अन्य छात्रों का भी शुगर लेवल तथा ब्लड प्रेशर काफी नीचे आ गया है। जिला और विश्वविद्यालय प्रशासन के चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी जांच कर रही है। डॉक्टरों ने लिखकर दे दिया है कि अब अनशन पर रहना छात्रों के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन छात्रनेता मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
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छात्रों में शनिवार को देर रात अनशनकारियों को उठाने की कोशिश के खिलाफ भी काफी नाराजगी रही। चिकित्सकों की रिपोर्ट के बाद भारी फोर्स के साथ रात तकरीबन डेढ़ बजे पहुंचे पुलिस विभाग के अफसरों ने उन्हें उठाने की कोशिश की, लेकिन अनशनकारी छात्रसंघ भवन में घुस गए। इसकी वजह से पुलिस छात्रनेताओं को तो नहीं पकड़ पाई, लेकिन बिस्तर आदि उठा ले गई। इसकी वजह से ऋचा समेत सभी अनशनकारियों को चबूतरे पर सोना पड़ा। हालांकि छात्रों के दबाव के बाद पुलिस ने रविवार को उनका बिस्तर वापस कर दिया।
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अध्यक्ष ऋचा सिंह ने ऐसे समय में कुलपति के विश्वविद्यालय छोड़कर चले जाने पर राष्ट्रपति, राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की है। रविवार को विवि के अफसर अनशनकारियों का हालचाल लेने नहीं पहुंचे। ऋचा ने इस पर भी नाराजगी जताई। उपाध्यक्ष विक्रांत का कहना है कि यह लोकतंत्र और राजनीति की नर्सरी पर हमला हो रहा है। यह आंदोलन पूर्णत: लोकतांत्रिक है। कुलपति को उनकी मांग मांगनी पड़ेगी। महामंत्री गोलू का कहना है कि यदि मांग नहीं मानी गई तो वे इस आंदोलन को वहां तक ले जाएंगे, जिसकी कुलपति ने कल्पना नहीं की होगी।

ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर शुरू आंदोलन केसमर्थन में एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव दीपक नेगी भी छात्रसंघ भवन पहुंचे। छात्रों के साथ बैठक में उन्होंने आंदोलन को मजबूती देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भी यह लड़ाई लड़ी जाएगी। मानस राय समेत कई छात्राें ने सदस्यता भी ग्रहण की। इससे पहले कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय सचिव का स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रीय सचिव विवेकानंद पाठक, विकास सिंह, गौरव त्रिपाठी, अनुराग राय, अनुराग पाल उत्तम, हरिनाम सिंह, राजीव यादव, अब्दुल कादिर आदि शामिल रहे।

ऑफलाइन के मुद़दे पर समाजवादी छात्रसभा ने हर स्तर पर संघर्ष की घोषणा की है। इसकी क्रम में सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भी पहुंच रहे हैं। बैठक में छात्र नेताआें ने सोमवार को घोषित आंदोलन को मजबूती प्रदान करने की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में अखिलेश गुप्ता, अंगद यादव, अरविंद सरोज, राजेश शर्मा आदि मौजूद रहे।

ऑफलाइन के मुद्दे पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शुरू आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। सोमवार को पूर्व सांसद धर्मराज सिंह पटेल ने छात्रसंघ भवन पहुंचकर अनशनकारियों की मांग का समर्थन किया। धर्मराज का कहना था कि कुलपति गरीब और हिन्दी भाषी विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित करने की साजिश रच रहे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने भी छात्रों से मिलकर समर्थन किया।


इसमें राज्य सचिव डॉ.गिरीश शर्मा, अरविंद राज स्वरूप, नसीम अंसारी, अमितांशू गौर, मयंक चक्रवर्ती, मुस्तकीम अहमद आदि शामिल रहे। आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के साथ बैठक में संघर्ष के लिए पंाच सदस्यीय कोर कमेटी भी गठित की गई। अपना दल में शामिल होने वाले डॉ.राजेश सिंह, पूर्व छात्रसंघ महामंत्री सुरेश यादव ने भी आंदोलन की घोषणा की है। आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राजेश सचान, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के हरदेव सिंह आदि ने भी छात्राें की मांग का समर्थन किया।
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