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High Court : मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करना राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी है

Thu, 24 Jul 2025 07:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 24 Jul 2025 07:23 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कहा कि मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश राज्य के साथ ही केंद्र सरकार के लिए भी बाध्यकारी है। सुप्रीम कोर्ट के तहसीन एस. पूनावाला मामले में दिए गए फैसले के अनुपालन के लिए पीड़ित हाईकोर्ट आने से पहले राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है।

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It is mandatory for the state government to implement Supreme Court instructions on mob lynching
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कहा कि मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश राज्य के साथ ही केंद्र सरकार के लिए भी बाध्यकारी है। सुप्रीम कोर्ट के तहसीन एस. पूनावाला मामले में दिए गए फैसले के अनुपालन के लिए पीड़ित हाईकोर्ट आने से पहले राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने आपराधिक जनहित याचिका निस्तारित कर दी। यह आदेश आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने जमीयत उलमा ए हिंद (अरशद मदनी) की जनहित याचिका पर दिया।

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जमीयत उलमा ए हिंद (अरशद मदनी) की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य व पुलिस महानिदेशक को अलीगढ़ के हरदुआगंज पुलिस स्टेशन में 24 मई, 2025 को दर्ज मुकदमे की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। एफआईआर में आरोप था कि भीड़ हिंसा में समुदाय विशेष के कम से कम चार लोगों को प्रतिबंधित मांस ले जाने के संदेह में बेरहमी से पीटा गया था। पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है। पीड़ितों को तत्काल वित्तीय सहायता, भीड़ हिंसा के मामलों से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, पिछले पांच वर्षों में हुई भीड़ हिंसा के मामलों की आपराधिक जांच की स्थिति रिपोर्ट और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग की।

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याची अधिवक्ता सैयद अली मुर्तजा ने दलील दी कि तहसीन एस. पूनावाला मामले में दिए गए निर्देशों का पालन करने में राज्य सरकारें विफल रही हैं। इसके चलते घृणास्पद भाषणों, गोवंश से संबंधित हिंसा में वृद्धि हुई है। वहीं, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने तहसीन एस. पूनावाला मामले दिए गए दिशा निर्देशों का उल्लेख किया। कहा कि इसके तहत प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करना, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त करना, भीड़ हिंसा के गंभीर परिणामों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता फैलाना और दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना शामिल है। यह सरकार पर साध्य बाध्य है।

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