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परीक्षा से जुड़े अभिलेखों की छानबीन में जुटी सीबीआई
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Updated Fri, 19 Oct 2018 01:34 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई अपर निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा-2010 के घोटालेबाजों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। सीबीआई को परीक्षा से संबंधित दस्तावेज हासिल हो चुके हैं और इसकी जांच भी शुरू की जा चुकी है। परीक्षा में व्यापक पैमाने पर धांधली की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में जांच पूरी होते ही सीबीआई परीक्षा में धांधली के लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई कर सकती है। इसके अलावा एक पूर्व अध्यक्ष समेत कुछ पूर्व सदस्य भी सीबीआई के निशाने पर हैं।
एपीएस परीक्षा कई चरणों में आयोजित की गई थी और हर चरण में इसमें गड़बड़ी के आरोप लगे। शिकायतें आने के बाद सीबीआई ने इसकी प्रारंभिक जांच की तो कुछ आरोप सही साबित हुए लेकिन तकनीकी कारणों से सीबीआई इस परीक्षा की आधिकारिक रूप से जांच नहीं कर सकती थी। इस पर प्रदेश सरकार की ओर से जांच के लिए सीबीआई को विशेष अनुमति दी गई। पिछले दिनों आयोग से एक ट्रक भरकर दस्तावेज सीबीआई मुख्यालय पहुंचाए गए, जिनमें एपीएस परीक्षा से संबंधित दस्तावेज भी शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने अब सीधे अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। इससे पूर्व हुई प्रारंभिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि एपीएस के पद पर ज्यादातर चयनित अभ्यर्थी आयोग या शासन स्तर के अफसरों के करीबी रिश्तेदार हैं। परीक्षा का परिणाम मार्च 2017 से पहले ही तैयार कर लिया गया था लेकिन तकनीकी कारणों से रिजल्ट रोक लिया गया। ऐसे में आयोग के पूर्व अध्यक्ष समेत कुछ सदस्य के भी इस गड़बड़ी में शामिल होने की आशंका है।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई तक यह शिकायत भी पहुंची है कि परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी के कारण कुछ पूर्व सदस्यों ने अंतिम परिणाम पर अपने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिए थे। इसके अलावा कई अभ्यर्थियों से परीक्षा के बाद कुछ ऐेसे दस्तावेज लिए गए, जो परीक्षा से पहले ही जमा हो जाने चाहिए थे। काउंटर पर बैठे कुछ कर्मचारियों ने जब बिना किसी लिखित आदेश के अभिलेख लेने से इनकार किया तो उन्हें हटा दिया गया। इसके अलावा टाइप एवं शॉर्टहैंड टेस्ट में मानक से कम अंक मिलने के बावजूद कई अभ्यर्थी उत्तीर्ण कर दिए गए। सीबीआई इन्हीं शिकायतों की अब अभिलेखों के आधार पर जांच कर रही है। जांच के बाद परीक्षा के घोटालेबाजों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
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एपीएस परीक्षा कई चरणों में आयोजित की गई थी और हर चरण में इसमें गड़बड़ी के आरोप लगे। शिकायतें आने के बाद सीबीआई ने इसकी प्रारंभिक जांच की तो कुछ आरोप सही साबित हुए लेकिन तकनीकी कारणों से सीबीआई इस परीक्षा की आधिकारिक रूप से जांच नहीं कर सकती थी। इस पर प्रदेश सरकार की ओर से जांच के लिए सीबीआई को विशेष अनुमति दी गई। पिछले दिनों आयोग से एक ट्रक भरकर दस्तावेज सीबीआई मुख्यालय पहुंचाए गए, जिनमें एपीएस परीक्षा से संबंधित दस्तावेज भी शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने अब सीधे अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। इससे पूर्व हुई प्रारंभिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि एपीएस के पद पर ज्यादातर चयनित अभ्यर्थी आयोग या शासन स्तर के अफसरों के करीबी रिश्तेदार हैं। परीक्षा का परिणाम मार्च 2017 से पहले ही तैयार कर लिया गया था लेकिन तकनीकी कारणों से रिजल्ट रोक लिया गया। ऐसे में आयोग के पूर्व अध्यक्ष समेत कुछ सदस्य के भी इस गड़बड़ी में शामिल होने की आशंका है।
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सूत्रों के मुताबिक सीबीआई तक यह शिकायत भी पहुंची है कि परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी के कारण कुछ पूर्व सदस्यों ने अंतिम परिणाम पर अपने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिए थे। इसके अलावा कई अभ्यर्थियों से परीक्षा के बाद कुछ ऐेसे दस्तावेज लिए गए, जो परीक्षा से पहले ही जमा हो जाने चाहिए थे। काउंटर पर बैठे कुछ कर्मचारियों ने जब बिना किसी लिखित आदेश के अभिलेख लेने से इनकार किया तो उन्हें हटा दिया गया। इसके अलावा टाइप एवं शॉर्टहैंड टेस्ट में मानक से कम अंक मिलने के बावजूद कई अभ्यर्थी उत्तीर्ण कर दिए गए। सीबीआई इन्हीं शिकायतों की अब अभिलेखों के आधार पर जांच कर रही है। जांच के बाद परीक्षा के घोटालेबाजों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
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