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यूपी : 29 महीने चली जांच, पांच विवेचक बदले, फिर भी न मिला सद्दाम, लगा दी एफआर, पीएम मोदी को कहा था अपशब्द

Sun, 01 Oct 2023 06:33 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 01 Oct 2023 06:33 AM IST
सार

माफिया अतीक अहमद के साले समद उर्फ सद्दाम की आपराधिक पृष्ठभूमि काफी लंबी है। उसके खिलाफ पीएम मोदी को अपशब्द कहने का भी मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन जांच मुकाम तक नहीं पहुंची और फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। 

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Investigation lasted 29 months, five investigators changed, still Saddam not found, even PM was abused
अब्दुल समद उर्फ सद्दाम। - फोटो : amar ujala

विस्तार

माफिया खालिद अजीम उर्फ अशरफ का साला सद्दाम पुलिस की साठगांठ से ही अपने काले धंधों को संचालित करता रहा। हैरतअंगेज है कि प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द कहने संबंधी वीडियो को वायरल करने पर तीन साल पहले दर्ज हुई एफआईआर से बचाने में भी पुलिस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। एफआईआर भी एक चौकी प्रभारी ने कराई थी। 29 महीने चली जांच में पांच बार विवेचक भी बदले गए। बावजूद इसके, इस तर्क के आधार पर क्लीनचिट दे दी गई कि वह खोजे नहीं मिल रहा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े इस प्रकरण की एफआईआर राजरूपपुर चौकी इंचार्ज चंद्रभानु ने 30 सितंबर 2020 को धूमनगंज थाने में दर्ज कराई थी। एफआईआर में उन्होंने कहा था कि समद उर्फ सद्दाम पुत्र मंंसूर निवासी हटवा पूरामुफ्ती ने फेसबुक पर एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल किया। इसमें प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्दों का प्रयोग किया गया। उसके इस कृत्य से शत्रुता फैलने की आशंका है। इससे शहर की शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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पांच जांच अधिकारी बदले गए, लगा दी गई फाइनल रिपोर्ट

अशरफ के साले सद्दाम के खिलाफ गालीगलौज व आईटी एक्ट के साथ ही दो वर्गों के बीच शत्रुता फैलाने की धाराएं लगीं। 29 महीने तक एक-एक कर पांच जांच अधिकारी बदले गए, लेकिन सद्दाम को खोजा नहीं जा सका। केस के पहले विवेचक इंस्पेक्टर राकेश कुमार थे। इसके बाद जांच का जिम्मा मान सिंह को दिया गया। जब उनसे भी कुछ नहीं हो पाया तो यह दायित्व अनुपम श्रीवास्तव को दिया गया। इसके बाद राजेश कुमार मौर्य को जांच सौंपी गई।

आखिरी जांच अधिकारी वजीउल्लाह खान बनाए गए और उन्होंने ही एक फरवरी 2023 को इस मामले में अंतिम रिपाेर्ट लगा दी। तर्क दिया कि तमाम प्रयासों के बावजूद सद्दाम का पता नहीं चल सका है। अशरफ के तमाम काले कारनामों को संभालने वाले सद्दाम को आखिर पुलिस खोज कैसे नहीं पाई, इससे भी बड़ा सवाल अधिकारियों की सहमति का है। उन्होंने अंतिम रिपोर्ट को कैसे हरी झंडी दिखा दी। इस सवाल पर दो पुलिस अधिकारियों से बातचीत की गई, लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से साफ इन्कार कर दिया।

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एक मुकदमे में लग चुकी थी चार्जशीट
 

सद्दाम को खोज नहीं पाने का हवाला देकर क्लीनचिट देने वाली धूमनगंज पुलिस ने दो महीने पहले ही एक मामले में इसके खिलाफ चार्जशीट भी लगा चुकी थी। तब, उसका बयान भी लिया गया था। यह मुकदमा था एक लाख के इनामी बहनोई अशरफ को संरक्षण देने और फरार होने में मदद करने का। इसकी एफआईआर आठ जून 2020 को लिखी गई थी।

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