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शिक्षा सेवा अधिकरण याचिका पर अंतर्हस्तक्षेपी अर्जी दाखिल, सुनवाई 9 अप्रैल को संभावित
Sat, 27 Mar 2021 12:40 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 27 Mar 2021 12:40 AM IST
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अदालत
इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा शिक्षा सेवा अधिकरण कानून के खिलाफ कायम जनहित याचिका में अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने अंतर्हस्तक्षेपी अर्जी दाखिल की है।जिसमें अधिकरण कानून को रद्द करने की मांग की गई है।
अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इससे पूर्व भी 2019 में लाए गए कानून को चुनौती दी गयी थी।कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा था।किन्तु आज तक जवाब दाखिल नहीं किया गया और थोड़ा बदलाव कर नया कानून पारित करा लिया गया है। जिसमें अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ व पीठ प्रयागराज में स्थापित करने की व्यवस्था की गई है।इसके फैसले के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने टी एम ए पई केस मे प्राइवेट अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के अध्यापकों, स्टाफ को सिविल वाद में उलझाने के बजाए राज्य सरकार को अधिकरण बनाने का सुझाव दिया था। राज्य सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के अध्यापक स्टाफ के लिए अधिकरण कानून बनाया है।जो सुप्रीम कोर्ट की मंशा के विपरीत है।ऐसे मामले हाईकोर्ट में तेजी से निपटाए जा रहे है।जनहित याचिका की सुनवाई 9अप्रैल को होने वाली है।
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अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इससे पूर्व भी 2019 में लाए गए कानून को चुनौती दी गयी थी।कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा था।किन्तु आज तक जवाब दाखिल नहीं किया गया और थोड़ा बदलाव कर नया कानून पारित करा लिया गया है। जिसमें अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ व पीठ प्रयागराज में स्थापित करने की व्यवस्था की गई है।इसके फैसले के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने टी एम ए पई केस मे प्राइवेट अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के अध्यापकों, स्टाफ को सिविल वाद में उलझाने के बजाए राज्य सरकार को अधिकरण बनाने का सुझाव दिया था। राज्य सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के अध्यापक स्टाफ के लिए अधिकरण कानून बनाया है।जो सुप्रीम कोर्ट की मंशा के विपरीत है।ऐसे मामले हाईकोर्ट में तेजी से निपटाए जा रहे है।जनहित याचिका की सुनवाई 9अप्रैल को होने वाली है।
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