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शबे बारात पर कब्रिस्तान जाने की बजाय घरों में ही पढे़ं फातिहा

Fri, 03 Apr 2020 01:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2020 01:00 AM IST
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instead of going to the graveyard on the shabe procession read  fatiha in the houses
काजी-ए-शहर मुफ़्ती शफीक अहमद शरीफ ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए मुसलमानों से अपील की है कि नौ अप्रैल को शबे बारात में कब्रिस्तान जाने की बजाए घर पर ही रह कर फातिहा पढ़ें और नमाज अदा करें। गरीबों की मदद करें और तौबा इस्तेगफार करें। शबे बारात पर मुसलमान अपने पूर्वजों की कब्रों पर पहुंच कर फूल चढा़ते हैं। शहर- ए-काजी ने कहा कि शाबान की 15वीं रात की इबादत अल्लाह की रजा हासिल करने का खास वक्त है। पूरे साल के सारे मामले रिज्क, हयात और मौत वगैरह का फैसला खुदा की जानिब से इसी रात हो जाता है। इसलिए इस मुकद्दस रात को अपने घरों में ही शबबेदारी करें और खूब इबादतें करें। इस रात के किसी हिस्से में कब्रिस्तान जाना भी सुन्नत है, मगर हालात को देखते हुए लोग अपने मरहूमीन और बुजुर्गों को घर से ही इस्ले शबाब करें। जरूरतमंदों को सके व खैरात देकर उसका शबाब मरहूमीन को पहुंचाएं। साथ ही रोजे रखकर बला से निजात की दुआएं मांगे।
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