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Prayagraj News: स्मार्ट मीटर लगने पर विद्युत सखियों की आजीविका पर संकट
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क्षेत्र में बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर विद्युत सखियों के लिए मुसीबत से कम नहीं हैं। जहां एक ओर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के जतन किए जा रहे है, वहीं डिजिटल क्रांति में जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। आय का जरिया बंद होने से विद्युत सखियां अब दूसरे रोजगार तलाशने को विवश हैं।
स्मार्ट मीटर लगने की प्रक्रिया तेज होते ही विद्युत सखियों की आमदनी भी प्रभावित हुई है। सरकार की मंशा थी कि महिलाएं घर-घर जाकर बिजली का बिल निकालें और कमीशन के जरिये आत्मनिर्भर बनें। लेकिन, अब डिजिटल मीटर और ऑटोमेटिक रीडिंग सिस्टम ने आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है।
बीसी सखियों रेनू, गीता का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद मैनुअल रीडिंग की जरूरत खत्म हो गई है, जिससे उन्हें मिलने वाला कमीशन बंद हो गया है। पहले विद्युत सखी को प्रति बिल जमा कराने पर 20 रुपये और अधिक धनराशि पर अतिरिक्त कमीशन मिलता था। इसके अलावा एक मुश्त समाधान योजना के तहत बड़े बकायेदारों का पैसा जमा कराने पर 100 रुपये कमीशन और प्रोत्साहन राशि का प्रावधान था।
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विद्युत सखी रेखा गुप्ता बताती हैं कि स्मार्ट मीटर के कारण रीडिंग नहीं हो रही, जिससे कमीशन न के बराबर हो गया है। वहीं, ओटीएस की राशि उपभोक्ता सीधे ऑनलाइन जमा कर देते हैं, जिससे सखियों को मिलने वाला 100 रुपये का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
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स्मार्ट मीटर लगने की प्रक्रिया तेज होते ही विद्युत सखियों की आमदनी भी प्रभावित हुई है। सरकार की मंशा थी कि महिलाएं घर-घर जाकर बिजली का बिल निकालें और कमीशन के जरिये आत्मनिर्भर बनें। लेकिन, अब डिजिटल मीटर और ऑटोमेटिक रीडिंग सिस्टम ने आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है।
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बीसी सखियों रेनू, गीता का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद मैनुअल रीडिंग की जरूरत खत्म हो गई है, जिससे उन्हें मिलने वाला कमीशन बंद हो गया है। पहले विद्युत सखी को प्रति बिल जमा कराने पर 20 रुपये और अधिक धनराशि पर अतिरिक्त कमीशन मिलता था। इसके अलावा एक मुश्त समाधान योजना के तहत बड़े बकायेदारों का पैसा जमा कराने पर 100 रुपये कमीशन और प्रोत्साहन राशि का प्रावधान था।
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विद्युत सखी रेखा गुप्ता बताती हैं कि स्मार्ट मीटर के कारण रीडिंग नहीं हो रही, जिससे कमीशन न के बराबर हो गया है। वहीं, ओटीएस की राशि उपभोक्ता सीधे ऑनलाइन जमा कर देते हैं, जिससे सखियों को मिलने वाला 100 रुपये का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।