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मेले के दौरान घर के भीतर महिला की हत्या
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 16 Oct 2016 02:06 AM IST
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इलाहाबाद। राजरूपपुर में दहशरा मेला के दौरान शुक्रवार रात झलवा में घर के भीतर रंजना त्रिपाठी (33) की धारदार औजार से कत्ल कर दिया गया। पति मेला घूमने गया था जबकि बच्चे दूसरे कमरे में सो रहे थे। तभी किसी ने सोते में ही रंजना पर हमला किया। बचने के लिए वह भागी लेकिन कमरे के बाहर गिर गई। उसे उठाकर परिजन अस्पताल ले गए लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी। फिलहाल कातिलों के बारे में पता नहीं चला है।
मूल रूप से कौशाम्बी जनपद निवासी संतोष त्रिपाठी बरसों पहले झलवा में बस गया था। भवन निर्माण के कारोबार के जरिए वह पत्नी रंजना त्रिपाठी (33) और बच्चों में नेहा (14), रीतू (12), निधि (10) और पुत्र यंत्र (5) के साथ गुजारा करता है। शुक्रवार रात उसने पत्नी-बच्चों को राजरूपपुर का दशहरा मेला घुमाया। फिर उन्हें घर में छोड़कर खुद मेला घूमने निकल गया। उसकी बड़ी बेटी नेहा कुछ दूर पर अपनी मौसी के घर में थी। पत्नी रंजना तीन बच्चों को दूसरे कमरे में सुलाकर खुद सोने चली गई। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे मकान के पहले तल पर बने कमरे में सो रहे चचेरे देवर दिलीप को रंजना की चीख सुनाई दी तो उसने नीचे आकर देखा। रंजना कमरे के बाहर पड़ी थी। दिलीप के मुताबिक उसे लगा कि लो बीपी की वजह से रंजना को चक्कर आया होगा। उसने फोन किया तो पति संतोष मौसेरे भाई नीरज शुक्ला के साथ आ गया। तब पता चला कि रंजना लहूलुहान है। उसके गले और पेट पर धारदार औजार से कई जख्म थे। रंजना को उठाकर पहले करीब के निजी हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने हाथ खडे़ किए तो दूसरे चिकित्सालय में ले जाया गया। तब तक में रंजना की मौत हो गई थी। इसके बाद धूमनगंज थाने की पुलिस को घटना की सूचना दी।
जान बचाने के लिए खूब किया था संघर्ष
मेले में मौजूद थानाध्यक्ष अशोक दुबे और सीओ आलोक मिश्रा मौके पर पहुंच गए। पुलिस को कमरे और बाहर चूड़ियां, पायल तथा मंगलसूत्र टूटा मिला। इससे साफ है कि रंजना ने जान बचाने के लिए कातिल से भरसक संघर्ष किया था। पेट ऐसा कटा था कि आंत निकल आई थी। गले पर भी गहरा धारदार जख्म था। पुलिस का अनुमान है कि कत्ल में उस्तरा या किसी बेहद पैने चाकू का इस्तेमाल किया गया था। यह भी आशंका है कि इस वारदात में कम से कम दो लोग शामिल थे वरना संघर्ष के दौरान रंजना के शरीर पर कई और जख्म होते। उसे पकड़ने के बाद हमला किया गया था। शनिवार सुबह मौके पर फोरेंसिक टीम के साथ डॉग स्कवॉयड को बुलाया गया। खोजी कुत्ता घर के पीछे से होकर कुछ दूर पर सूर्या ढाबा की तरफ जाकर भौंकने लगा। ऐसे में यह माना गया है कि कातिल हमले के बाद घर के पिछवाड़े से ढाबे की तरफ भागे थे। दीवार पर पैरों के निशान मिले।
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कातिल तो परिवार का ही कोई सदस्य
घटना की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस का अनुमान है कि रंजना के कत्ल के तार परिवार से जुड़े हैं। कोई करीबी शख्स ही इस कत्ल में शामिल है। सीओ आलोक मिश्रा के मुताबिक, पति समेत कई लोगों की भूमिका की जांच हो रही है। बच्चों ने रिश्ते के एक युवक का नाम लिया है। उन्होंने शायद कातिल को देख लिया था। संदिग्ध युवक मोबाइल ऑफ कर लापता बताया गया है। उसे लेकर कुछ समय पहले परिवार में विवाद हुआ था। उसकी तलाश की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद रंजना के शव का दारागंज घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। खबर पाकर कौशाम्बी के महेवा घाट से आए मायके वालों ने किसी पर शक नहीं जताया। रंजना तीन बहनों में बड़ी थी। पिता रामनरेश त्रिपाठी रिटायर्ड शिक्षक हैं। पति संतोष के माता-पिता का देहांत हो चुका है। उसके भाई-बहन भी नहीं हैं। उसने पत्नी की हत्या में अज्ञात के खिलाफ केस लिखाया है। कत्ल की वजह अभी साफ नहीं हो सकी। थानाध्यक्ष ने बताया कि पिछले साल पुलिस ने संतोष को पकड़ा था लेकिन तब परिजनों ने चौकी में ही मामला सुलझा लिया था।
क्या हुआ मां को, पूछता रहा मासूम
-रंजना की हत्या ने उसके चार बच्चो से असमय मां का साया और दुलार छीन लिया है। 14 से 10 साल की बेटियां नेहा, रीतू और निधि रात में मां का शव देखने के बाद से ही रोती कलपती रहीं। मगर पांच साल का बेटा यंत्र नहीं समझ पा रहा कि आखिर हुआ क्या? वह रो रही बहनों से बार-बार पूछता रहा कि मम्मी को क्या हुआ? उन्हें कहां ले जाया गया? मौसी समेत रिश्ते की महिलाएं बेटियों को बेटे को संभालती रहीं।
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मूल रूप से कौशाम्बी जनपद निवासी संतोष त्रिपाठी बरसों पहले झलवा में बस गया था। भवन निर्माण के कारोबार के जरिए वह पत्नी रंजना त्रिपाठी (33) और बच्चों में नेहा (14), रीतू (12), निधि (10) और पुत्र यंत्र (5) के साथ गुजारा करता है। शुक्रवार रात उसने पत्नी-बच्चों को राजरूपपुर का दशहरा मेला घुमाया। फिर उन्हें घर में छोड़कर खुद मेला घूमने निकल गया। उसकी बड़ी बेटी नेहा कुछ दूर पर अपनी मौसी के घर में थी। पत्नी रंजना तीन बच्चों को दूसरे कमरे में सुलाकर खुद सोने चली गई। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे मकान के पहले तल पर बने कमरे में सो रहे चचेरे देवर दिलीप को रंजना की चीख सुनाई दी तो उसने नीचे आकर देखा। रंजना कमरे के बाहर पड़ी थी। दिलीप के मुताबिक उसे लगा कि लो बीपी की वजह से रंजना को चक्कर आया होगा। उसने फोन किया तो पति संतोष मौसेरे भाई नीरज शुक्ला के साथ आ गया। तब पता चला कि रंजना लहूलुहान है। उसके गले और पेट पर धारदार औजार से कई जख्म थे। रंजना को उठाकर पहले करीब के निजी हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने हाथ खडे़ किए तो दूसरे चिकित्सालय में ले जाया गया। तब तक में रंजना की मौत हो गई थी। इसके बाद धूमनगंज थाने की पुलिस को घटना की सूचना दी।
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जान बचाने के लिए खूब किया था संघर्ष
मेले में मौजूद थानाध्यक्ष अशोक दुबे और सीओ आलोक मिश्रा मौके पर पहुंच गए। पुलिस को कमरे और बाहर चूड़ियां, पायल तथा मंगलसूत्र टूटा मिला। इससे साफ है कि रंजना ने जान बचाने के लिए कातिल से भरसक संघर्ष किया था। पेट ऐसा कटा था कि आंत निकल आई थी। गले पर भी गहरा धारदार जख्म था। पुलिस का अनुमान है कि कत्ल में उस्तरा या किसी बेहद पैने चाकू का इस्तेमाल किया गया था। यह भी आशंका है कि इस वारदात में कम से कम दो लोग शामिल थे वरना संघर्ष के दौरान रंजना के शरीर पर कई और जख्म होते। उसे पकड़ने के बाद हमला किया गया था। शनिवार सुबह मौके पर फोरेंसिक टीम के साथ डॉग स्कवॉयड को बुलाया गया। खोजी कुत्ता घर के पीछे से होकर कुछ दूर पर सूर्या ढाबा की तरफ जाकर भौंकने लगा। ऐसे में यह माना गया है कि कातिल हमले के बाद घर के पिछवाड़े से ढाबे की तरफ भागे थे। दीवार पर पैरों के निशान मिले।
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कातिल तो परिवार का ही कोई सदस्य
घटना की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस का अनुमान है कि रंजना के कत्ल के तार परिवार से जुड़े हैं। कोई करीबी शख्स ही इस कत्ल में शामिल है। सीओ आलोक मिश्रा के मुताबिक, पति समेत कई लोगों की भूमिका की जांच हो रही है। बच्चों ने रिश्ते के एक युवक का नाम लिया है। उन्होंने शायद कातिल को देख लिया था। संदिग्ध युवक मोबाइल ऑफ कर लापता बताया गया है। उसे लेकर कुछ समय पहले परिवार में विवाद हुआ था। उसकी तलाश की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद रंजना के शव का दारागंज घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। खबर पाकर कौशाम्बी के महेवा घाट से आए मायके वालों ने किसी पर शक नहीं जताया। रंजना तीन बहनों में बड़ी थी। पिता रामनरेश त्रिपाठी रिटायर्ड शिक्षक हैं। पति संतोष के माता-पिता का देहांत हो चुका है। उसके भाई-बहन भी नहीं हैं। उसने पत्नी की हत्या में अज्ञात के खिलाफ केस लिखाया है। कत्ल की वजह अभी साफ नहीं हो सकी। थानाध्यक्ष ने बताया कि पिछले साल पुलिस ने संतोष को पकड़ा था लेकिन तब परिजनों ने चौकी में ही मामला सुलझा लिया था।
क्या हुआ मां को, पूछता रहा मासूम
-रंजना की हत्या ने उसके चार बच्चो से असमय मां का साया और दुलार छीन लिया है। 14 से 10 साल की बेटियां नेहा, रीतू और निधि रात में मां का शव देखने के बाद से ही रोती कलपती रहीं। मगर पांच साल का बेटा यंत्र नहीं समझ पा रहा कि आखिर हुआ क्या? वह रो रही बहनों से बार-बार पूछता रहा कि मम्मी को क्या हुआ? उन्हें कहां ले जाया गया? मौसी समेत रिश्ते की महिलाएं बेटियों को बेटे को संभालती रहीं।