इंदिरा मैराथन : स्वरूप-सत्यभामा का वर्षों पुराना रिकार्ड कायम
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इंदिरा मैराथन में स्वरूप सिंह का 35 और सत्यभामा का 25 वर्षों पुराना रिकार्ड अब भी कायम है। दोनों ही वर्ग में अन्य वर्षों के विजेता इनके रिकार्ड से काफी पीछे रह गए। वहीं 2021 की विजेता निरमाबेन महिलाओं में चौथी तथा पुरुषों में बेलीएप्पा इंदिरा मैराथन के पांचवें सबसे तेज धावक बन गए हैं।
इंदिरा मैराथन की शुरुआत 1985 में हुई थी और इसके विजेता स्वरूप सिंह रहे। स्वरूप सिंह 1986 में भी दो घंटे 13 मिनट 57 सेकेंड में दौड़ पूरी करके विजेता रहे, जो अब भी रिकार्ड है। 2007 के विजेता राम सिंह यादव ने दो घंटे 18 मिनट 20 सेकेंड में यह दौड़ पूरी की थी और इंदिरा मैराथन के वह दूसरे सबसे तेज खिलाड़ी हैं। 2018 के विजेता वीएस धोनी ने दो घंटे 19 मिनट 11.2 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी और इंदिरा मैराथन में रिकार्ड के लिहाज से तीसरे स्थान पर हैं।
2008 के विजेता दीप चंद्र शारण ने दो घंटे 19 मिनट 34.9 सेकेंड में दौड़ पूरी करके विजेता बने थे और इंदिरा मैराथन के चौथे सबसे तेज धावक हैं। वहीं इस वर्ष के विजेता बेलीएप्पा ने दो घंटे 20 मिनट 53 सेकेंड में यह दौड़ पूरी कर जीत हासिल की। इंदिरा मैराथन के इतिहास में स्वरूप सिंह, राम सिंह, वीएस धोनी और दीप सिंह ही इनसे आगे हैं। इस तरह से एलियप्पा इंदिरा मैराथन के पांचवें सबसे तेज धावक हैं।
वहीं महिलाओं के वर्ग में 1996 की विजेता सत्यभामा ने दो घंटे 44 मिनट 40 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी। यह रिकार्ड के तौर पर अब भी दर्ज है। 2009 की विजेता सुकन्या मल्ल ने दो घंटे 49 मिनट 53 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी। 1998 की विजेता शास्त्री देवी ने दो घंटे 50 मिनट 34 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी और इंदिरा मैराथन की तीसरी सबसे तेज महिला खिलाड़ी हैं। वहीं 2021 की विजेता निरमाबेन ने दो घंटे 50 मिनट 41 सेकेंड का समय लिया। इस तरह से 42.195 किमी की दूरी वाले इंदिरा मैराथन में वह चौथी सबसे तेज महिला धावक बन गई हैं।
कोविड संक्रमण के खतरे को देखते हुए इस वर्ष क्रास कंट्री के दौड़ शामिल नहीं किए गए। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों की दौड़ नहीं हुई। जबकि, इन प्रतियोगियों को लेकर खासतौर पर स्थानीय खिलाड़ियों में काफी उत्साह रहा है और हर वर्ष सैकड़ों धावक शामिल होते रहे हैं। इससे खिलाड़ियों के साथ शहरियों में भी निराशा रही।
बुजुर्गों ने भी उत्साह, दिखाया दम, पूरी की मैराथन की दौड़
इंदिरा मैराथन को लेकर बुजुर्ग धावकों में भी खासा उत्साह दिखा। क्रास कंट्री दौड़ नहीं होने की वजह से 50 वर्ष या इससे अधिक उम्र के कई धावकों ने मैराथन में दम दिखाया। इनमें से कई ने 42.195 किमी की दूरी दौड़कर पूरी भी की।
बलिया के 64 वर्षीय चंद्रभान सिंह आठ वर्षों से क्रास कंट्री दौड़ में शामिल होते रहे लेकिन इस बार सिर्फ मैराथन का आयोजन हुआ। ऐसे में उन्होंने मैराथन के लिए ही दौड़ लगा दी। अधिक उम्र की वजह से आयोजकों ने उनका रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया। इसके बावजूद वह शामिल हुए और दौड़ पूरी की। हालांकि, रजिस्ट्रेशन नहीं होने से उनमें नाराजगी रही। जौनपुर के 51 वर्षीय सुरेंद्र प्रताप यादव तथा सेना से रिटायर नैनी के राजेश कुमार यादव ने भी 42.195 किमी की दौड़ पूरी की। इनके अलावा लखनऊ के 46 वर्षीय दीपेश जोशी और उनकी पत्नी रचना ने भी मैराथन में हिस्सा लिया और दौड़ पूरी की।