Indian Air Force : तीन बड़े युद्ध में अहम भूमिका निभा चुका है मध्य वायु कमान, प्राकृतिक आपदा के समय भी मददगार
पाकिस्तान से हुए तीन सीधे युद्ध में प्रयागराज स्थित मध्य वायु कमान (सीएसी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1965, 1971 एवं 1999 में हुई जंग में कमान ने हवाई शक्ति प्रदर्शन कर देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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पाकिस्तान से हुए तीन सीधे युद्ध में प्रयागराज स्थित मध्य वायु कमान (सीएसी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1965, 1971 एवं 1999 में हुई जंग में कमान ने हवाई शक्ति प्रदर्शन कर देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खास बात यह है कि वायु सेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह मध्य वायु कमान में चीफ मार्शल रह चुके हैं। मध्य वायु कमान तमाम ऑपरेशनों में अपनी अपेक्षाओं पर खरा उतरा है। चाहे वह ऑपरेशन पवन हो, ऑपरेशन कैक्टस हो या ऑपरेशन सफेद सागर। इसमें कमान के जांबाजों ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। मध्य वायु कमान मुख्यालय की स्थापना जून, 1963 में कोलकाता के रानी-कुटीर में की गई थी। तब इसके उत्तरदायित्व क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य मध्य भारतीय क्षेत्र शामिल थे।
फरवरी, 1966 में मध्य वायु कमान मुख्यालय को बमरौली, प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में स्थानांतरित कर दिया गया। प्रयागराज का वायुसेना स्टेशन बमरौली, जो मुख्यालय सीएसी के साथ सह-स्थित है, पहले एक नागरिक हवाई क्षेत्र था। मुख्यालय सीएसी को प्रयागराज में स्थानांतरित करने के बाद, यह हवाई क्षेत्र भारतीय वायुसेना का परिवहन बेस बन गया। अपनी स्थापना के बाद से ही मध्य वायु कमान ने एक शानदार युद्ध रिकॉर्ड भी बनाया है। यह कमान सभी महत्वपूर्ण रणनीतिक स्क्वाड्रनों का बेस भी रहा है। 1965 और 1971 के दौरान भारत-पाक संघर्षों और 1999 में कारगिल युद्ध में यहां के स्क्वाड्रनों ने शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में, मध्य वायु कमान ने पूर्वी पाकिस्तान में हवाई संचालन का नेतृत्व किया था।
सीएसी के तहत डेवन्स, लिबरेटर्स, पैकेट, जीएनएटी, वैम्पायर, डकोटा, कैनबरा, बेल जी2 और जी3एम, एसयू-7 और एसयू-30 एमकेआई, जगुआर, मिराज-2000, मिग शृंखला के एसी, एवीआरओ, एएन-12 और एएन-32, आईएल-76 और आईएल-78 एमकेआई, चेतक, चीता, एमआई-4 जैसे विमानों का संचालन हो चुका है। कमान के पास वर्तमान में मौजूद विमान किसी भी लक्ष्य को तलाशने, उस पर हमला करने और उसे नष्ट करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, सीएसी में विभिन्न वायु रक्षा रडार और सतह से हवा में मार करने वाली तमाम आधुनिक मिसाइलें भी हैं। इस वजह से यहां भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है।
प्राकृतिक आपदाओं में चुनौतियों का सामना
नेपाल में आया हुआ भूंकप हो या फिर बिहार की बाढ़। ऐसी तमाम आपदाओं के समय मध्य वायु कमान ने चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। आपदाओं में राहत कार्यों में सीएसी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में बाढ़ राहत, ओडिशा में चक्रवात आने के बाद वहां राहत बचाव कार्य में सीएसी आगे रहा है।
‘दमनीयः आत्मशत्रवः’ मध्य वायु कमान का आदर्श वाक्य है। इसका अर्थ है शत्रु का दमन करो। शत्रु का दमन करने में मध्य वायु कमान हमेशा आगे रहा है। - समीर गंगाखेड़कर, ग्रुप कैप्टन एवं पीआरओ रक्षा मंत्रालय