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High Court : अचानक झगड़े और आवेश में हुई घटना, हत्या नहीं, उम्रकैद की सजा गैर इरादन हत्या में तब्दील

Sat, 02 May 2026 07:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 02 May 2026 07:02 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अचानक झगड़े और आवेश में हुई घटना को हत्या नहीं माना जा सकता। साथ ही कोर्ट ने आरोपियों की हत्या की सजा को घटाकर गैर इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया।

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Incident occurred in a sudden quarrel and anger, not murder, sentence of life imprisonment converted
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अचानक झगड़े और आवेश में हुई घटना को हत्या नहीं माना जा सकता। साथ ही कोर्ट ने आरोपियों की हत्या की सजा को घटाकर गैर इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने महेश सिंह व अन्य की याचिका पर दिया।

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आरोपी महेश सिंह व अन्य के खिलाफ शाहजहांपुर के रोजा थाने में हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। आठ जुलाई 2016 को एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन के अनुसार पंचायत चुनाव के दौरान मृतक का आरोपियों के परिवार से संबंध बना था। मृतक ने आरोपियों को 1.5 लाख रुपये उधार दिए थे। पैसे वापस मांगने पर उसे घर बुलाया गया। जहां विवाद के दौरान आरोपियों ने गोली मारकर और धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी।
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ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही एक लाख का जुर्माना लगाया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन की कहानी संदेह से परे साबित नहीं हुई है। घटना पूर्व नियोजित नहीं थी बल्कि अचानक विवाद के दौरान हुई। इसलिए अधिक से अधिक यह मामला गैर इरादतन हत्या का बनता है।
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वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से मृतक को बुलाकर सामूहिक रूप से उसकी हत्या की। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान और चिकित्सीय साक्ष्य अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला सही है और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।


कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर साबित होता है कि घटना अचानक झगड़े और आवेश में हुई। इसमें पूर्वनियोजन का अभाव है। यह आपराधिक मानव वध का मामला है जो हत्या की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने आरोपियों को पहले से जेल में काटी गई सजा के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जुर्माना यथावत रखा ।

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