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दो वकीलों के बावजूद अतीक को चाहिए ‘पसंद’ का वकील
इलाहाबाद
Updated Wed, 17 May 2017 02:20 AM IST
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अतीक अहमद (फाइल फोटो)
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पूर्व सांसद अतीक अहमद राजूपाल हत्याकांड में जमानत निरस्त कराने की अर्जी पर सुनवाई के लिए अपनी पसंद का वकील नियुक्त करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट को देवरिया जेल से पत्र भेजकर चार सप्ताह की मोहलत मांगी है। हालांकि उनका पक्ष रखने के लिए मंगलवार को दो अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी और रवींद्र शर्मा मौजूद थे।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा तक आश्चर्य में पड़ गए जब अतीक की ओर से उपस्थित अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने बताया कि उनके मुवक्किल ने इस अदालत (कोर्ट नंबर 51) को 11 मई को जेल से एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अदालत से अपनी पसंद का वकील नियुक्त करने के लिए चार सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया है।
कोर्ट ने कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं कि अतीक अहमद को जमानत निरस्ती की अर्जी के संबंध में इस अदालत से भेजा गया नोटिस चार मई को ही प्राप्त हो चुका है। इस दौरान उनके पास पसंद का वकील नियुक्त करने का पर्याप्त समय था। इससे भी ज्यादा आश्चर्य इस बात का है कि उनके अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने किन परिस्थितियों में और कैसे निर्देश प्राप्त किए यदि अतीक ने उनको मुकदमे की पैरवी का निर्देश नहीं दिया है। अतीक यदि जेल से पत्र भेज सकते हैं तो वकालतनामा क्यों नहीं भेज सकते ? अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने अभी तक न तो वकालत नामा दाखिल किया गया है और न ही पर्चा।
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कोर्ट के पूछने पर रवींद्र शर्मा ने बताया कि वह अतीक की पत्नी के निर्देश पर इस मुकदमे में उपस्थित हुए हैं। उन्होंने वकालतनामा दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। कोर्ट ने कहा कि अतीक अहमद का यह व्यवहार ही उनके बारे में बहुत कुछ कहता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी ने अदालत से दस दिन का समय देने का अनुरोध किया। उनको दस दिन की मोहलत प्रदान करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह यह समय मात्र वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी के अनुरोध और उनकी वरिष्ठता का सम्मान करते हुए दे रहे हैं। हाईकोर्ट अब इस मामले में 29 मई 2017 को सुनवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि पूजा पाल ने राजूपाल हत्याकांड में अतीक की जमानत निरस्त करने के लिए वर्ष 2016 में हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। सोमवार को प्रकरण न्यायमूर्ति बिपिन सिन्हा के समक्ष सुनवाई के लिए आया। प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कांत, शासकीय अधिवक्ता विमलेंदु त्रिपाठी और पूजा पाल की ओर से मिथलेश तिवारी उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी और रवींद्र शर्मा ने कोर्ट में उपस्थित होकर बताया कि उनके पास अतीक की ओर इस मामले में उपस्थित होने का निर्देश है। वरिष्ठ अधिवक्ता के व्यक्तिगत अनुरोध पर अदालत ने सुनवाई एक दिन के लिए टालते हुए मंगलवार 16 मई को नियत कर दी थी।
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मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा तक आश्चर्य में पड़ गए जब अतीक की ओर से उपस्थित अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने बताया कि उनके मुवक्किल ने इस अदालत (कोर्ट नंबर 51) को 11 मई को जेल से एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अदालत से अपनी पसंद का वकील नियुक्त करने के लिए चार सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया है।
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कोर्ट ने कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं कि अतीक अहमद को जमानत निरस्ती की अर्जी के संबंध में इस अदालत से भेजा गया नोटिस चार मई को ही प्राप्त हो चुका है। इस दौरान उनके पास पसंद का वकील नियुक्त करने का पर्याप्त समय था। इससे भी ज्यादा आश्चर्य इस बात का है कि उनके अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने किन परिस्थितियों में और कैसे निर्देश प्राप्त किए यदि अतीक ने उनको मुकदमे की पैरवी का निर्देश नहीं दिया है। अतीक यदि जेल से पत्र भेज सकते हैं तो वकालतनामा क्यों नहीं भेज सकते ? अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने अभी तक न तो वकालत नामा दाखिल किया गया है और न ही पर्चा।
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कोर्ट के पूछने पर रवींद्र शर्मा ने बताया कि वह अतीक की पत्नी के निर्देश पर इस मुकदमे में उपस्थित हुए हैं। उन्होंने वकालतनामा दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। कोर्ट ने कहा कि अतीक अहमद का यह व्यवहार ही उनके बारे में बहुत कुछ कहता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी ने अदालत से दस दिन का समय देने का अनुरोध किया। उनको दस दिन की मोहलत प्रदान करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह यह समय मात्र वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी के अनुरोध और उनकी वरिष्ठता का सम्मान करते हुए दे रहे हैं। हाईकोर्ट अब इस मामले में 29 मई 2017 को सुनवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि पूजा पाल ने राजूपाल हत्याकांड में अतीक की जमानत निरस्त करने के लिए वर्ष 2016 में हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। सोमवार को प्रकरण न्यायमूर्ति बिपिन सिन्हा के समक्ष सुनवाई के लिए आया। प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कांत, शासकीय अधिवक्ता विमलेंदु त्रिपाठी और पूजा पाल की ओर से मिथलेश तिवारी उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी और रवींद्र शर्मा ने कोर्ट में उपस्थित होकर बताया कि उनके पास अतीक की ओर इस मामले में उपस्थित होने का निर्देश है। वरिष्ठ अधिवक्ता के व्यक्तिगत अनुरोध पर अदालत ने सुनवाई एक दिन के लिए टालते हुए मंगलवार 16 मई को नियत कर दी थी।