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लॉक डाउन में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज कंट्रोल से बाहर

Fri, 15 May 2020 12:42 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2020 12:42 AM IST
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in lockdown the number of bp and diabeties patients raised
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) की डिस्पेंसरियों में अचानक सप्लायर बदल किए जाने से दवाओं का टोटा हो गया है। गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को दवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। मामले में सीजीएचएस प्रशासन ने सप्लायर को एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था सुधार लेने की चेतावनी दी है।
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प्रयागराज में सीजीएचएस की सात डिस्पेंसरियां हैं और इनसे तकरीबन लाख लाभार्थी जुड़े हैं। इनमें केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर्स और इनके आश्रित शामिल हैं। इन्हें सीजीएचएस से मुफ्त दवाएं मिलती हैं। कुछ दवाएं सीधे स्टोर से उपलब्ध करा दी जाती हैं और ज्यादातर दवाएं इंडेंट होती हैं, जो सप्लायर के माध्यम से रोज मंगाई जाती हैं। सीजीएचएस में एक मई से सप्लायर बदल दिया गया है। नई एजेंसी दवाओं की सप्लाई नहीं कर पा रही है। नियमत: दवा इंडेंट होने के अगले दिन ही मरीज को उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है लेकिन हालत इतनी खराब हो गई है कि चार मई को इंडेंट की गईं तमाम दवाएं अब तक मरीजों को नहीं मिली हैं। इसकीज शिकायत लगातार सीजीएचएस प्रशासन से की जा रही है।
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हालांकि केंद्र सरकार ने लॉक डाउन के मद्देनजर सीजीएचएस के लाभार्थियों को यह सुविधा दी है कि ब्लड प्रेशर, हार्ट, न्यूरो, किडनी, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज, जो नियमित रूप से दवाओं का सेवन कर रहे हैं, वे केवल विशेषज्ञों के पर्चे के आधार पर 31 मई तक सीधे बाजार से दवाएं खरीद सकते हैं। बाद में बिल दिखाने पर खर्च की प्रतिपूर्ति कर दी जाएगी। लेकिन, ये दवाएं इतनी महंगी हैं कि ज्यादातर मरीज बाजार से दवाएं नहीं खरीद पा रहे और मजबूरी में सीजीएचएस जाना पड़ा रहा है लेकिन सप्लाइयर मरीजों को दवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहा।
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सीजीएचएस ने दवाओं की खरीद पर आने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति के भुगतान की व्यवस्था भी बदल दी है। अगर सप्लायर दवा उपलब्ध नहीं पाता है तो पर्चे पर च्नॉट सप्लाईज् लिख दिया जाता है। इस आधार पर मरीज बाजार से दवा खरीदकर बिल को डिस्पेंसरी के इंचार्ज से सत्यापित कर लेते थे हैं सप्लाइयर भुगतान कर देता है, लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। भुगतान सप्लायर नहीं करेगा। इंचार्ज से बिल को सत्यापत कराने के बाद सिविल लाइंस स्थित अपर निदेशक कार्यालय जाकर बिल को जमा करना होगा और नियमों के तहत 45 दिनों के भीतर भुगतान की धनराशि संबंधित मरीज के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।


सप्लाइयर को 28 फरवरी को ही बदला जाना था लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए दो माह रुककर बदलाव किया गया। दवाओं की सप्लाई को लेकर शिकायतें आ रहीं थी। सप्लायर पर दबाव बनाया गया है और सप्लाई में काफी सुधार हुआ है। सप्लायर को चेतावनी दी गई है कि एक सप्ताह में सुधार करे, वरना कार्रवाई होगी। मरीजों की सुविधाओं का पूरी तरह से ध्यान रखा जा रहा है।
-डॉ. आरके श्रीवास्तव, अपर निदेशक, सीजीएचएस इलाहाबाद
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