IMSCON 2024 : 40 वर्ष की उम्र में गर्भधारण करने में मां व बच्चे को होती हैं कई शारीरिक समस्याएं
डाॅ. ऋषिकेश पाई ने डाॅ. एके बंसल ओरेशन पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कई ऐसे बच्चों में डाउन सिंड्रोम आदि की समस्या भी पायी गई। इसके साथ ही अधिक उम्र में प्रेगनेंसी रेट भी कम हो जाता है। इन सब जटिलतायों को देखते हुए अब कई महिलाएं अपना एग फ्रीज करवा रहीं हैं, जिससे सही समय आने पर एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकें।
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40 वर्ष की उम्र में गर्भधारण करने में मां व बच्चे को कई शारीरिक समस्यांए हो सकती हैं। इस उम्र में महिलाओं में अंडाणु की संख्या कम होने लगती है। ऐसा भी देखा गया है कि अधिक उम्र में मां बनने पर उनके बच्चों में कई अनुवांशिक समस्याएं हो गई। कई ऐसे बच्चों में डाउन सिंड्रोम आदि की समस्या भी पायी गई। इसके साथ ही अधिक उम्र में प्रेगनेंसी रेट भी कम हो जाता है। इन सब जटिलतायों को देखते हुए अब कई महिलाएं अपना एग फ्रीज करवा रहीं हैं, जिससे सही समय आने पर एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकें।
इलाहाबाद मीनोपॉज सोसाइटी की तरफ से इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के कन्वेंशन सभागार में इंडियन मीनोपॉज सोसाइटी की 29वीं राष्ट्रीय कांफ्रेंस (आईएमएससीओएन-2024) के तीसरे दिन मुंबई से आये डाॅ. ऋषिकेश पाई ने डाॅ. एके बंसल ओरेशन पर व्याख्यान देते हुए कही। ऑर्गनाइजिंग चेयरपर्सन व जीवन ज्योति हॉस्पिटल की निदेशक डाॅ. वंदना बंसल, अध्यक्ष इलेक्ट डाॅ. अंजू सोनी, डाॅ. अनुराधा खन्ना व डाॅ. रंजना खन्ना ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर कई प्रमुख जानकारी दी।
अंतिम दिन एडवांस्ड लप्रोस्कोपिक सर्जन डाॅ. अर्पित बंसल ने लेप्रोस्कोपी व हिस्टेरोस्कोपी प्रक्रिया पर, इंटरवेंशनल रेडियोलाजिस्ट डाॅ. हर्षित बंसल ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के विभिन्न इलाज की उपयोगिता पर, बाल्य रोग विशेषज्ञ डाॅ. साक्षी आर बंसल का ओवेरियन व ब्रैस्ट कैंसर का जेनेटिक्स से संबंध, डाॅ. प्रभु मिश्रा ने स्टेम सेल, डाॅ. सेजल अजमेरा ने जीएसएम पर जानकारी दी। इस दौरान कांफ्रेंस की ओर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डाॅ. शांति चौधरी, डाॅ. अंजुला सहाय, डाॅ. मोनिका सिंह, डाॅ. रणधीर सिंह, डाॅ. अमृता चौरसिया सहित अन्य मौजूद रहीं। इस अवसर पर मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर पैनल डिस्कशन हुए।
43 वर्ष की उम्र के बाद जब महिलाओं में पीरियड बंद होने लगते हैं, तो काफी शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जिसमें एकदम से ठंड व गर्मी लगना, डिप्रेशन में जाना, रात में नींद न आना, पसीना आना व उलझन होना शामिल है। इस प्रकार की समस्या दो तीन साल बनी रहती है। ऐसे में सही इलाज के लिए महिलाओं को चाहिए कि वह 40 वर्ष के बाद चिकित्सक से संपर्क करके अपनी काउंसलिंग शुरू कर दें, ताकि इस प्रकार की समस्याओं के लिए तैयार रहें। - डॉ. पुष्पा सेठी, अध्यक्ष, इंडियन मीनोपॉज सोसाइटी, हरियाणा।
ब्रस्ट कैंसर औरतों में सबसे ज्यादा होता है। हर चार मिनट में एक महिला को ब्रस्ट कैंसर होता है। ऐसे में अगर ब्रस्ट कैंसर की जानकारी समय पर हो जाये, तो पीड़ित महिला का बेहतर इलाज किया जा सकता है। चिकित्सकों को चाहिए कि वह ब्रस्ट कैंसर के बारे में सही जानकारी रखें। क्योंकि शुरूआती समय में इसका पता चलना जरूरी है। देर होने महिलाओं के इलाज कें तमाम तरह की समस्याएं आती हैं। - डॉ. यशोदा, पूर्व प्रोफेसर, केजीएमसी, लखनऊ
आयुर्वेद के पंचकर्म का रजोनिवृत्ति काल की महिलाओं में लाभ
महर्षि सुश्रुत ने पांच हजार वर्ष पहले ही रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) काल के बारें में चर्चा की थी। जिसकी उम्र उन्होंने पचास वर्ष बताई थी। इसमें तीन तरह की महिलाएं, जिसमें कम वजन, जलन महसूस होना व अधिक वजन वाली महिलाओं शामिल हैं। जिसमें कम वजन वाली महिलाओं को मीठा, नमकीन व आंवला जैसे पदार्थ का सेवन करें और तिल के तेज से मालिस करनी चाहिए। अधिक वजन की महिलाएं तीखा, कड़वा व कसैला भोजन करें और सरसों के तेल से मालिस करनी चाहिए। वहीं दाने व जलन होने पर मीठा, आंवला और कटु रस का सेवन करना चाहिए और नारियल के तेल से मालिस होती है। - डॉ. एसके राय, अध्यक्ष, नीमा, प्रयागराज।