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अस्थियां विसर्जित, संगम में समाए नीलाभ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 26 Jul 2016 01:52 AM IST
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इलाहाबाद
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इलाहाबाद। कवि, नाटककार तथा वाम सांस्कृतिक आंदोलन के अगुआ नीलाभ की अस्थियां सोमवार को संगम में विसर्जित कर दी गईं। अस्थियां लेकर भतीजे और पत्नी भूमिका प्रयागराज एक्सप्रेस से इलाहाबाद पहुंचीं। अस्थिविसर्जन से पूर्व वैदिक रीति से पूजन किया गया। वहीं शाम को खुसरोबाग स्थित आवास पर पत्नी और श्वेताभ, अनुराग सहित परिजनों की मौजूदगी में शांति हवन किया गया।
जुटे परिजनों, साहित्यकारों, कवियों, रंगकर्मियों आदि ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये। जुटे परिजनों, रचनाकारों ने नीलाभ के व्यवहार, उनकी लेखन शैली और उनके साथ बिताए पलों को फिर-फिर साझा किया। श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में प्रणय कृष्ण, संतोष भदौरिया, संध्या नवोदिता, राकेश तिवारी, हरिश्चंद्र पांडे, सर्वेश शुक्ला, अरिंदम घोष, संतोष चतुर्वेदी, बीके मिश्रा समेत काफी संख्या में रचनाकार मौजूद रहे।
सम्मेलन की सभा में भी याद किए गए नीलाभ
हिंदी साहित्य सम्मेलन में रविवार को साहित्यकार नीलाभ और सम्मेलन के पूर्व प्रबंधमत्री गोकुलचंद्र शास्त्री के निधन पर शोक व्यक्त किया। दो मिनट का मौन रखकर मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। अधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि नीलाभ प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार थे। उनके पिता उपेंद्रनाथ अश्क सम्मेलन के कार्यवाहक उपसभापति के रूप में मंत्री मंडल के सदस्य थे। नीलाभ कई बार सम्मेलन की गोष्ठियों और परिसंवादों में भी शामिल हुए थे। गोकुल चंद्र शास्त्री लगभग 45 वर्षों तक सम्मेलन की स्थायी समिति, कार्य समिति और मंत्र के रूप में जुड़े रहकर सम्मेलन की और हिंदी की सेवा की। उनका सम्मेलन के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. प्रभात शास्त्री के साथ धनिष्ठ संबंध रहा।
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जुटे परिजनों, साहित्यकारों, कवियों, रंगकर्मियों आदि ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये। जुटे परिजनों, रचनाकारों ने नीलाभ के व्यवहार, उनकी लेखन शैली और उनके साथ बिताए पलों को फिर-फिर साझा किया। श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में प्रणय कृष्ण, संतोष भदौरिया, संध्या नवोदिता, राकेश तिवारी, हरिश्चंद्र पांडे, सर्वेश शुक्ला, अरिंदम घोष, संतोष चतुर्वेदी, बीके मिश्रा समेत काफी संख्या में रचनाकार मौजूद रहे।
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सम्मेलन की सभा में भी याद किए गए नीलाभ
हिंदी साहित्य सम्मेलन में रविवार को साहित्यकार नीलाभ और सम्मेलन के पूर्व प्रबंधमत्री गोकुलचंद्र शास्त्री के निधन पर शोक व्यक्त किया। दो मिनट का मौन रखकर मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। अधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि नीलाभ प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार थे। उनके पिता उपेंद्रनाथ अश्क सम्मेलन के कार्यवाहक उपसभापति के रूप में मंत्री मंडल के सदस्य थे। नीलाभ कई बार सम्मेलन की गोष्ठियों और परिसंवादों में भी शामिल हुए थे। गोकुल चंद्र शास्त्री लगभग 45 वर्षों तक सम्मेलन की स्थायी समिति, कार्य समिति और मंत्र के रूप में जुड़े रहकर सम्मेलन की और हिंदी की सेवा की। उनका सम्मेलन के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. प्रभात शास्त्री के साथ धनिष्ठ संबंध रहा।
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