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ट्रिपलआईटी विज्ञान समागम में जुटे विज्ञानी
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 09 Dec 2014 12:28 AM IST
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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में सातवां विज्ञान समागम सोमवार को शुरू हो गया। विज्ञान समागम में लगभग एक हजार शोधार्थियों, वैज्ञानिकों एवं छात्र-छात्राएं भागीदारी कर रहे हैं। लगातार सातवीं बार हो रहे विज्ञान समागम का शुभारंभ अमेरिकी नोबेल विज्ञानी प्रो. राबर्ट कर्ल ने किया। उन्होंने युवा शोधार्थियों को अपनी उपलब्धियों से जोड़ने के साथ परिवर्तन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
प्रो. कर्ल ने 1996 में डिस्कवरी ऑफ कार्बन 60 नामक अपने आविष्कार के बारे में जानकारी साझा की। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता इसरो के वैज्ञानिक प्रो. एन वेदाचलम ने की। विज्ञान समागम में जुटे वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं अतिथियों का स्वागत ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. सोमनाथ विश्वास ने किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों को बताया कि संसद में बिल पारित होने के बाद अब ट्रिपलआईटी राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिल गया है। उद्घाटन सत्र में प्रो. जोसेफ सिफाकिस, प्रो. जयंत विष्णु नार्लीकर, प्रो. जयंत भट्टाचार्य, प्रो. अशोक सेन शामिल रहे। संस्थान केप्रो. एम राधाकृष्णन ने विज्ञान समागम के माध्यम से छात्रों को होने वाले लाभ से अवगत कराया। संस्थान के डीन एकेडमिक्स प्रो. जीसी नंदी ने सातवें विज्ञान समारोह के सफल आयोजन की उपलब्धियों को परिचित कराने के साथ आठवें विज्ञान समागम के आयोजन की संभावना भी जताई।
विज्ञान समागम की पहली सांस्कृतिक संध्या मणिपुरी नृत्यांगना विम्बावती के नाम रही। नृत्यांगना ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ मोहक प्रस्तुति की। मशहूर नृत्यांगना के समूह की प्रस्तुति के दौरान देश-विदेश से जुटे वैज्ञानिकों, शोधार्थियों ने आनंद उठाया। इस प्रस्तुति केसाथ सृजन चटर्जी ने ने अपने श्लोक गायन से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में सोमवार को शुरू हुए सातवें विज्ञान समागम में भाग लेने आए अमेरिकी नोबेल विज्ञानी प्रो. राबर्ट कर्ल ने कहा कि एजुकेशन सिस्टम लचीला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लचीला एजुकेशन सिस्टम होने पर कमजोर विद्यार्थी भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। उनके हायर एजुकेशन हासिल करने की संभावना बढ़ जाएगी। उन्होंने अब तक जिस देश में गए वहां की शिक्षा व्यवस्था आम छात्रों के अनुरूप थी।
उन्होंने छात्रों से कहा कि विद्यार्थी जिज्ञासु बनें, इसके जरिए वह नई जानकारी हासिल कर सकेंगे। प्रो. कर्ल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था एवं समाज में हो रहे बदलाव का स्वीकार करें तथा दिन प्रतिदिन लगातार अपडेट होते रहें। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में नए आविष्कार के अनुरूप बदलाव होना चाहिए। उन्होंने स्कूली छात्रों से प्रयोगशाला में अधिक समय लगाने के साथ शोध के क्षेत्र में जाने की सलाह दी।
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प्रो. कर्ल ने 1996 में डिस्कवरी ऑफ कार्बन 60 नामक अपने आविष्कार के बारे में जानकारी साझा की। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता इसरो के वैज्ञानिक प्रो. एन वेदाचलम ने की। विज्ञान समागम में जुटे वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं अतिथियों का स्वागत ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. सोमनाथ विश्वास ने किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों को बताया कि संसद में बिल पारित होने के बाद अब ट्रिपलआईटी राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिल गया है। उद्घाटन सत्र में प्रो. जोसेफ सिफाकिस, प्रो. जयंत विष्णु नार्लीकर, प्रो. जयंत भट्टाचार्य, प्रो. अशोक सेन शामिल रहे। संस्थान केप्रो. एम राधाकृष्णन ने विज्ञान समागम के माध्यम से छात्रों को होने वाले लाभ से अवगत कराया। संस्थान के डीन एकेडमिक्स प्रो. जीसी नंदी ने सातवें विज्ञान समारोह के सफल आयोजन की उपलब्धियों को परिचित कराने के साथ आठवें विज्ञान समागम के आयोजन की संभावना भी जताई।
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विज्ञान समागम की पहली सांस्कृतिक संध्या मणिपुरी नृत्यांगना विम्बावती के नाम रही। नृत्यांगना ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ मोहक प्रस्तुति की। मशहूर नृत्यांगना के समूह की प्रस्तुति के दौरान देश-विदेश से जुटे वैज्ञानिकों, शोधार्थियों ने आनंद उठाया। इस प्रस्तुति केसाथ सृजन चटर्जी ने ने अपने श्लोक गायन से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में सोमवार को शुरू हुए सातवें विज्ञान समागम में भाग लेने आए अमेरिकी नोबेल विज्ञानी प्रो. राबर्ट कर्ल ने कहा कि एजुकेशन सिस्टम लचीला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लचीला एजुकेशन सिस्टम होने पर कमजोर विद्यार्थी भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। उनके हायर एजुकेशन हासिल करने की संभावना बढ़ जाएगी। उन्होंने अब तक जिस देश में गए वहां की शिक्षा व्यवस्था आम छात्रों के अनुरूप थी।
उन्होंने छात्रों से कहा कि विद्यार्थी जिज्ञासु बनें, इसके जरिए वह नई जानकारी हासिल कर सकेंगे। प्रो. कर्ल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था एवं समाज में हो रहे बदलाव का स्वीकार करें तथा दिन प्रतिदिन लगातार अपडेट होते रहें। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में नए आविष्कार के अनुरूप बदलाव होना चाहिए। उन्होंने स्कूली छात्रों से प्रयोगशाला में अधिक समय लगाने के साथ शोध के क्षेत्र में जाने की सलाह दी।