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High Court : प्राकृतिक कारणों से गुणवत्ता में कमी होती है तो वह मिलावट नहीं, कोर्ट ने दुकानदार को किया बरी

Wed, 13 Aug 2025 02:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 13 Aug 2025 02:27 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि प्राकृतिक कारणों से खाद्य सामग्री की गुणवत्ता में कमी आती है तो उसे मिलावट नहीं माना जाएगा। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने पनीर में मिलावट मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई छह माह की सजा को रद्द कर दिया।

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If there is a decrease in quality due to natural reasons, then it is not adulteration, the court acquitted the
अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि प्राकृतिक कारणों से खाद्य सामग्री की गुणवत्ता में कमी आती है तो उसे मिलावट नहीं माना जाएगा। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने पनीर में मिलावट मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई छह माह की सजा को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने पंचम सिंह चौहान की आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी पर दिया।

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चंदौली निवासी पंचम कुमार की दुकान से 20 नवंबर 2010 को खाद्य निरीक्षक ने पनीर का नमूना लिया था। जांच रिपोर्ट से पता चला कि पनीर के दूध में फैट की मात्रा 35.8 प्रतिशत थी जबकि निर्धारित न्यूनतम सीमा 50 प्रतिशत होनी चाहिए। इस कमी के कारण नमूने को मिलावटी घोषित कर दिया गया। दुकानदार के खिलाफ खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम शिकायत दर्ज की गई।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंदौली ने 25 जनवरी 2014 को पंचम को दोषी ठहराते हुए छह महीने की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। पंचम की अपील को भी 31 मई 2018 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम में यह प्रावधान है कि अगर प्राथमिक खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता में कमी प्राकृतिक कारणों से हो रही है तो उसे मिलावटी नहीं माना जाएगा। कोर्ट कहा, दूध में फैट की मात्रा में कमी दूध की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। इस पर विचार नहीं किया गया था। इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए पंचम को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

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