{"_id":"618d477497745452695b8510","slug":"if-the-mining-companies-that-destroy-the-environment-do-not-warn-then-there-is-a-big-loss","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रयागराज : पर्यावरण को चौपट करने वाली खनन कंपनियां नहीं चेतीं तो बड़ा नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रयागराज : पर्यावरण को चौपट करने वाली खनन कंपनियां नहीं चेतीं तो बड़ा नुकसान
Thu, 11 Nov 2021 10:10 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 11 Nov 2021 10:10 PM IST
सार
वन अनुसंधानकर्ताओं को दो दिवसीय सम्मेलन में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक अरुण सिंह रावत ने चेताया। देसी वृक्ष प्रजातियों के क्लोन विकसित कर भूमि को उपजाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने पर दिया जोर।
विज्ञापन
पर्यावरण
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
खनिज संपदा के दोहन से पर्यावरण को चौपट करने वाली खनन कंपनियां नहीं चेतीं को बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और पुनर्वास के लिए उनको वानिकी अनुसंधान करने वाले वैज्ञानिकों और ऐसे केंद्रों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। ताकि, पर्यावरण सुधार की मुहिम को सफल बनाया जा सके। बृहस्पतिवार को यह बातें पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र के वार्षिकोत्सव पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर ऑनलाइन जुड़े भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक अरुण सिंह रावत ने कही।
महानिदेशक ने परिषद के देश भर के 14 संस्थानों के वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वह भारतीय जलवायु में पैदा होने वाली ऐसी प्रजातियों को विकसति करें, जिससे भूमि की उर्वरकता बढ़ाने के साथ ही किसानों की आय में वृद्धि की जा सके। उन्होंने ऐसी कई प्रजातियों की चर्चा की, जिनसे बेकार भूमि को उपजाऊ बनाने के साथ ही किसानों की आय में इजाफा हो सकता है।
उनका कहना था कि वानिकी में जैव विविधिता के लिए देसी प्रजातियों के क्लोन विकसित करने वाली तकनीक पर काम किया जाना चाहिए। वानिकी से किसानों की आय दो नहीं, तीन गुना तक बढ़ाई जा सकती है। इस दौरान पर्यावरणविदों और वानिकी अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों ने कैजुराइना, मीलिया डूबिया, नीलगिरि, सागौन और बांस के क्लोन से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने पर जोर दिया।
विज्ञापन
रायपुर से आए डॉ लालजी सिंह ने शुष्क वातावरण में नीलगिरी के पौधों के कार्बन संग्रहण पर जोर दिया, तो असम से आए सत्यम बोरदोलोई ने सरल अनुक्रम दोहराव की जीनोम की पहचान के साथ ही अगर वृक्ष की प्रजातियों को विकसित कर मुनाफा कमाने की सलाह दी। वन अनुसंधान संस्थान के मोहम्मद इब्राहिम ने बांस की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी।
इसके बाद दूसरे और अंतिम तकनीकी सत्र में डॉ संतन बर्थवाल,बालकृष्ण तिवारी, डॉ. अनुकूल श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त किए। इसके बाद हुई संगीत संध्या में सत्यव्रत म्यूजिकल ग्रुप की ओर से मोहक प्रस्तुतियां की गईं। इस मौके पर केंद्र के निदेशक डॉ. संजय सिंह. वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनीता तोमर, डॉ कुमुद दुबे, डॉ अलोक यादव, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. एसडी शुक्ला और रतन गुप्ता उपस्थित थे। केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
विज्ञापन
महानिदेशक ने परिषद के देश भर के 14 संस्थानों के वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वह भारतीय जलवायु में पैदा होने वाली ऐसी प्रजातियों को विकसति करें, जिससे भूमि की उर्वरकता बढ़ाने के साथ ही किसानों की आय में वृद्धि की जा सके। उन्होंने ऐसी कई प्रजातियों की चर्चा की, जिनसे बेकार भूमि को उपजाऊ बनाने के साथ ही किसानों की आय में इजाफा हो सकता है।
विज्ञापन
उनका कहना था कि वानिकी में जैव विविधिता के लिए देसी प्रजातियों के क्लोन विकसित करने वाली तकनीक पर काम किया जाना चाहिए। वानिकी से किसानों की आय दो नहीं, तीन गुना तक बढ़ाई जा सकती है। इस दौरान पर्यावरणविदों और वानिकी अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों ने कैजुराइना, मीलिया डूबिया, नीलगिरि, सागौन और बांस के क्लोन से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने पर जोर दिया।
विज्ञापन
रायपुर से आए डॉ लालजी सिंह ने शुष्क वातावरण में नीलगिरी के पौधों के कार्बन संग्रहण पर जोर दिया, तो असम से आए सत्यम बोरदोलोई ने सरल अनुक्रम दोहराव की जीनोम की पहचान के साथ ही अगर वृक्ष की प्रजातियों को विकसित कर मुनाफा कमाने की सलाह दी। वन अनुसंधान संस्थान के मोहम्मद इब्राहिम ने बांस की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी।
इसके बाद दूसरे और अंतिम तकनीकी सत्र में डॉ संतन बर्थवाल,बालकृष्ण तिवारी, डॉ. अनुकूल श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त किए। इसके बाद हुई संगीत संध्या में सत्यव्रत म्यूजिकल ग्रुप की ओर से मोहक प्रस्तुतियां की गईं। इस मौके पर केंद्र के निदेशक डॉ. संजय सिंह. वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनीता तोमर, डॉ कुमुद दुबे, डॉ अलोक यादव, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. एसडी शुक्ला और रतन गुप्ता उपस्थित थे। केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।