प्रयागराज : गुमनाम शहीद बनेंगे प्रयागराज जंक्शन की पहचान, आजादी के अमृत महोत्सव पर रेलवे की अनूठी पहल
मोदी सरकार द्वारा देश की आजादी के 75 वर्ष को आजादी के अमृत महोत्सव के मनाया जा रहा है। रेलवे द्वारा भी अमृत महोत्सव को लेकर तमाम आयोजन पिछले कुछ समय किए जा रहे हैं।
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आजादी के अमृत महोत्सव आयोजन के तहत इस बार उत्तर मध्य रेलवे का प्रयागराज मंडल एक अनूठी पहल करने जा रहा है। प्रयागराज जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन बनने जा रहा है, जहां देश की आजादी में अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले यहां एक दर्जन से ज्यादा गुमनाम शहीदों केचित्र एवं उनसे जुड़ी अन्य जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी। खास बात यह कि इन शहीदों केचित्र यहां स्थायी रूप से लगाए जाने की तैयारी है।
दरअसल मोदी सरकार द्वारा देश की आजादी के 75 वर्ष को आजादी के अमृत महोत्सव के मनाया जा रहा है। रेलवे द्वारा भी अमृत महोत्सव को लेकर तमाम आयोजन पिछले कुछ समय किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब रेलवे द्वारा संगम नगरी के चर्चित और गुमनाम शहीदों की याद में एक अनूठी गैलरी बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। प्रयागराज जंक्शन के मुख्य हॉल की दीवारों एवं खंभों में इन शहीदों की फोटो लगाने के साथ उनके योगदान के बारे में दर्शाया जाएगा।
इसमें से अधिकांश ऐसे शहीद हैं जिनके बारे में लोगों को कोई खास जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि इन गुमनाम शहीदों के बारे में तमाम जानकारियां रेलवे द्वारा वीरेंद्र पाठक द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘प्रयाग से प्रयागराज तक’ से ली गई है। वीरेंद्र पाठक ने बताते हैं कि उनसे पिछले दिनों प्रयागराज मंडल के अफसरों ने संपर्क भी साधा था। रेल प्रशासन को उन्होंने कुछ गुमनाम शहीदों की फोटो भी उपलब्ध करवाई है।
फिलहाल जंक्शन पर प्रयागराज से जुड़े जिन शहीदों की गाथा प्रदर्शित होगी उसमें अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद, शहीद लाल पद्मधर तो रहेंगे ही, साथ ही इसके सरदार रामचंद, मुरारी मोहन भट्टाचार्य, द्वारिका प्रसाद, महावीर, अब्दुल मजीद, त्रिलोक नाथ कपूर, नियामत उल्ला, हनुमान पंडित, सोहन लाल, सूरज नारायण आदि की गाथाएं भी मुख्य हॉल में प्रदर्शित की जाएंगी।
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत तमाम आयोजन हो रहे हैं और आगे भी होेंगे। जंक्शन पर शहीदों की शौर्यगाथा प्रदर्शित करने पर विचार हो रहा है। आगे जैसा भी होगा अवगत कराया जाएगा। - मोहित चंद्रा, डीआरएम प्रयागराज।
शहीदों से जुड़ी जानकारी
सरदार रामचंद : इनके बारे में कहा जाता है कि यह 6वीं इंफैटरी रेजीमेंट के विद्रोही सिपाही थे। जून क्रांति में बनारस से यह दस्ता प्रयागराज (तब इलाहाबाद) आया। इसमें दो फौजी रेजीमेंट में बंट कर आजादी के दीवाने युद्ध कर रहे थे। एक का नेतृत्व लियाकत अली तो दूसरे का सरदार रामचंद्र ने किया। तब पहली बार हिंदू मुस्लिम एक होकर अंग्रेजोें
द्वारिका प्रसाद : 14 अगस्त 1942 को इलाहाबाद के लोग अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। तब शहर का मध्यभाग आंदोलनकारियों का केंद्र था। इसी दौरान हीवेट रोड निवासी 22 वर्ष के द्वारिका प्रसाद को अंग्रेजी हुकूमत ने सत्याग्रह करने की सजा दी और उन्हें गोलियों से भून दिया गया।
मुरारी मोहन भट्टाचार्य : 13 अगस्त 1942 को शहर में जगह-जगह हो रहे आंदोलन को कुचलने का ब्रिटिश हुकूमत हर संभव प्रयास कर रही थी। तब शाहगंज निवासी मुरारी मोहन भट्टाचार्य जो झा एंड कंपनी दवा की दुकान में काम करते थे, वह कुछ सत्याग्रहियों के साथ निकल पड़े। उन्हें भी अंग्रेजों ने गोली मार दी थी।
हनुमान पंडित : हनुमान प्रसाद तिवारी उर्फ हनुमान पंडित गुरिल्ला लड़ाई में माहिर थे। वर्ष 1857 में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेज हनुमान पंडित से सवा वर्ष परेशान रहे। तब ब्रिग्रेडियर कैंपबेल ने 15 दिसंबर से एक बड़ा अभियान शुरू किया। हनुमान पंडित और उनके साथियों ने कई बार लड़ाईयां लड़ी थी।