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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Husband will have to pay alimony as soon as the wife becomes Mature High Court upheld the order trial court.

High Court : बालिग होते ही पति को देना पड़ेगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लगाई मुहर

Wed, 01 Oct 2025 11:58 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 01 Oct 2025 11:58 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग पति के खिलाफ भरण-पोषण के तहत आवेदन दाखिल किया जा सकता है। हालांकि, भरण पोषण की जिम्मेदारी बालिग होने के बाद ही शुरू होगी।

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Husband will have to pay alimony as soon as the wife becomes Mature High Court upheld the order trial court.
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग पति के खिलाफ भरण-पोषण के तहत आवेदन दाखिल किया जा सकता है। हालांकि, भरण पोषण की जिम्मेदारी बालिग होने के बाद ही शुरू होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने अभिषेक सिंह यादव की पुनरीक्षण अर्जी पर दिया है।

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बरेली निवासी अभिषेक के खिलाफ पत्नी ने परिवार न्यायालय में वाद दाखिल कर नाबालिग बेटी व स्वयं के लिए भरण पोषण की मांग की। न्यायालय ने पत्नी के लिए 5,000 रुपये और बेटी को 4,000 रुपये प्रति माह भुगतान को लेकर याचिका दाखिल करने की तारीख 10 फरवरी 2019 से करने का आदेश दिया था। इस आदेश को अभिषेक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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अधिवक्ता एसएम इकबाल हसन ने दलील दी कि याची की उम्र एक जनवरी 2003 है। ऐसे में पत्नी की ओर से भरण पोषण के लिए आवेदन दाखिल करते समय 10 फरवरी 2019 को याची की उम्र लगभग 16 वर्ष थी। इसलिए नाबालिग होने के कारण उसके खिलाफ भरण पोषण का मामला पोषणीय नहीं था।

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हाईकोर्ट ने कहा, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-125 में कोई भी ऐसा प्रावधान नहीं है जो किसी नाबालिग पति के खिलाफ भरण पोषण आवेदन दाखिल करने से रोकता हो। भरण-पोषण के लिए आवेदन दाखिल करते वक्त वह नाबालिग था लेकिन जब ट्रायल कोर्ट ने 22 नवंबर 2023 को आदेश दिया तो वह बालिग हो चुका था। ऐसे में वह भरण पोषण के लिए जिम्मेदार है।



हालांकि, कोर्ट ने नाबालिग पति की वित्तीय जिम्मेदारी पर विचार किया। कोर्ट ने माना कि याची एक जनवरी 2021 को बालिग हुआ था। इसलिए उस तारीख से वह भरण पोषण के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा। हालांकि, कोर्ट ने पति की कोई आय नहीं होने के आधार पर भरण पोषण के आदेश को संशोधित कर दिया। इसके तहत पत्नी को 2500 रुपये और बेटी को 2000 रुपये भरण पोषण देने का आदेश दिया।

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