हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत : पत्नी और बेटी की हत्या के 18 साल पुराने मामले में पति की उम्रकैद की सजा बरकरार
फर्रुखाबाद जिले की है घटना। युवक ने पत्नी और बेटी की कर दी थी हत्या।निचली अदालत ने आजीवन उम्रकैद के साथ बीस हजार जुर्माने की सुनाई थी सजा। उसके खिलाफ अभियुक्त ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचना की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 साल पुराने मामले में पत्नी और बेटी के हत्यारे पति की उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि याची की याचिका गलत है इसलिए वह रद्द की जाती है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय की दो जजों की खंडपीठ ने की।
याची अनूप कुमार जैन उर्फ बबलू जैन ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा 2015 में दिए गए आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याची के वकील अधिवक्ता अखिलेश कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह ने तर्क दिया कि याची मानसिक रूप विक्षिप्त था और घटना से पहले उसका उपचार चल रहा था, लेकिन, जवाब में सरकारी अधिवक्ता मंजू ठाकुर का तर्क था कि याची ने इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिए हैं। कोर्ट ने भी पाया कि याची का कथन केवल उसके बयानों पर आधारित है। याची ने उसके लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए।
याची पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी से पांच लाख रुपये की डिमांड की थी। जब पत्नी पति की डिमांड पूरी नहीं कर पाई तो उसने पत्नी और बेटी दोनों की हत्या कर दी। मामले में पत्नी मधु जैन के भाई ने फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
निचली अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए याची अनूप कुमार जैन उर्फ बबलू जैन को आजीवन उम्रकैद के साथ बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हत्यारे बबलू ने निजी अदालत के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।