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पति की जाति का प्रमाणपत्र लगाने पर नियुक्ति देने से इंकार पर जवाब तलब
Thu, 04 Feb 2021 08:15 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 04 Feb 2021 08:15 PM IST
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अदालत
- फोटो : file
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69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित ओबीसी अभ्यर्थी द्वारा अपने पति की जाति का प्रमाण पत्र लगाने पर उसे नियुक्ति से बाहर करने पर बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। याची अभ्यर्थी का कहना है कि उसके पति भी ओबीसी हैं इसलिए उनकी जाति का प्रमाणपत्र लगाने से उसे आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है।
मथुरा की सविता की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे हैं। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि था याची का 69 हजार सहायक अध्यापक में चयन हो गया। 15 अप्रैल 20 को उसकी काउंसलिंग हो गई और उसे मथुरा में विद्यालय आवंटन भी कर दिया गया। चार दिसंबर 20 को जारी शासनादेश के क्लाज 3(2) का हवाला देते हुए याची की नियुक्ति इस आधार पर निरस्त कर दी गई कि उसने अपने जाति प्रमाणपत्र में पति की जाति का प्रमाणपत्र न लगाकर पति की जाति का प्रमाणपत्र लगाया है।
अधिवक्ता का कहना था कि याची ओबीसी वर्ग की है और उसने ओबीसी से ही शादी की है। ऐसे में उसे ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ देने से इंकार नहीं किया जा सकता है। याची का यह भी कहना था कि उसका गुणांक सामान्य वर्ग की अंतिम चयनित महिला अभ्यर्थी से अधिक है। इस आधार पर वह सामान्य वर्ग में चयनित किए जाने योग्य है इसलिए उसकी नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने इस मामले में परिषद को जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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मथुरा की सविता की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे हैं। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि था याची का 69 हजार सहायक अध्यापक में चयन हो गया। 15 अप्रैल 20 को उसकी काउंसलिंग हो गई और उसे मथुरा में विद्यालय आवंटन भी कर दिया गया। चार दिसंबर 20 को जारी शासनादेश के क्लाज 3(2) का हवाला देते हुए याची की नियुक्ति इस आधार पर निरस्त कर दी गई कि उसने अपने जाति प्रमाणपत्र में पति की जाति का प्रमाणपत्र न लगाकर पति की जाति का प्रमाणपत्र लगाया है।
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अधिवक्ता का कहना था कि याची ओबीसी वर्ग की है और उसने ओबीसी से ही शादी की है। ऐसे में उसे ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ देने से इंकार नहीं किया जा सकता है। याची का यह भी कहना था कि उसका गुणांक सामान्य वर्ग की अंतिम चयनित महिला अभ्यर्थी से अधिक है। इस आधार पर वह सामान्य वर्ग में चयनित किए जाने योग्य है इसलिए उसकी नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने इस मामले में परिषद को जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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