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लॉक डाउन से मानव और प्रकृति, दोनों को फायदा

Tue, 28 Apr 2020 12:51 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2020 12:51 AM IST
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human and nature boath will get the benefit by lockdown
लॉकडाउन से मानव एवं प्रकृति दोनों को लाभ हुआ है। मृत्यु दर में कमी, स्वास्थ्य में सुधार, तनाव और चिंता में कमी, प्रदूषण एवं दुर्घटना मृत्यु दर में कमी, जैविक-अजैविक घटकों में सुधार इस बात का उदाहरण हैं। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल के प्रोफेसर डॉ. सूर्य बली ने बतौर मुख्य वक्ता ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में लॉक डाउन के संदर्भ में आयोजित कार्यशाला में वर्तमान एवं पूर्व के पर्यावरण के बीच तुलना करते हुए कही।
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‘कोविड-19: लॉक डाउन एंड एनवायर्नमेंटल रेस्टोरशन’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा की पर्यावरणविद् डॉ. अंबरीना सरदार खान ने कहा कि कोविड-19 ने संपूर्ण मानव जाति को आइना दिखाया है। इस वैश्विक महामारी के लिए स्वयं मानव ही जिम्मेदार है, जिसने प्रकृति विरोधी कार्य किया। मानव न तो खाद्य शृंखला के नियमों को खंडित कर चमगादड़ जैसे जीवों का भक्षण करता न ही यह दिन दिखने को मिलता। इससे पूर्व कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद शंकर सिंह ने ऑनलाइन कार्यशाला में देश भर से शामिल अतिथियों का स्वागत करते हुए इस कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के संयोजक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की।
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राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) के कार्यकारी सचिव डॉ. नीजर कुमार ने महामारी से बचने एवं प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मोरिंगा जैसे वनस्पतियों से बने न्यूटासिटिकल भोज्य पदार्थों को ग्रहण करने की सलाह दी। इसके अलावा उत्तर प्रदेेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के डॉ. अतुल कुमार मिश्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. शैलेंद्र राय, होक्कैडो विश्वविद्यालय जापान के पर्यावरण पृथ्वी विज्ञान के रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस के विशेषज्ञ डॉ. राम अवतार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैैज्ञानिक डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, कृष्णाथ कॉलेज पश्चिम बंगाल के परिस्थितिकी विद् डॉ. संदीप मोरे ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। आयोजन सचिव डॉ. शचि सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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