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कैसें करें पढ़ाई, हर दिन कठिन होती जा रही लड़ाई

Mon, 06 Apr 2020 09:48 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2020 09:48 PM IST
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how to study the battle is getting harder every day
मम्फोर्डगंज में आबकारी मुख्यालय के पीछे खपरैल के मकान में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अनुराग द्विवेदी लॉक डाउन में फंस गए हैं। मूलत: बस्ती के रहने वाले अनुराग यहां ट्यूशन पढ़ाकर गुजर-बसर करते हैं। पांच सौ रुपये कमरे का किराया और बाकी डेढ़ हजार रुपये में महीने का खर्च निकल आता है।
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लॉक डाउन में ट्यूशन बंद है। आमदनी ठप हो गई है और एक वक्त की रोटी से काम चलाना पड़ रहा है। उनके पास स्मार्ट फोन भी नहीं है कि देश-दुनिया का हाल जान सकें या उन संस्थानों से संपर्क कर सकें जो लॉक डाउन में फंसे प्रतियोगी छात्रों तक मदद पहुंचा रही हैं। अनुराग जब एमए प्रथम वर्ष में थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया और उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। बस्ती में उनकी मां और दो छोटी बहने हैं। बहनों की शादी भी करनी है। जब मौका मिलता है, अनुराग घर जाकर थोड़ा बहुत राशन ले आते हैं। इस वक्त कुछ सीनियर्स सौ-दो सौ रुपये की मदद कर दे रहे हैं। अनुराग तनाव में हैं और उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं संबंधी तैयारी भी प्रभावित हो रही है। अनुराग का कहना है कि जैसे ही लॉक डाउन खत्म होगा, सबसे पहले घर जाएंगे और वहां से राशन लेकर आएंगे।
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कुछ ऐसी ही समस्या का सामना प्रतियोगी छात्रा माला कुमारी को भी करना पड़ रहा है। गोरखपुर से स्नातक करने के बाद वह यहां 2013 में तैयारी करने आईं थीं। इलाहाबाद आने के कुछ दिनों बाद ही पिता का देहांत हो गया। वह निजी वाहन चलाते थे। कमला नेहरू अस्पताल के पास फतेहपुर बिछुवा में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं माला एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ती थीं, जो बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने ट्यूशन शुरू कर दिया। लॉक डाउन में ट्यूशन बंद हो गया है। थोड़ा बहुत बचाया था, अब उसी से खर्च निकलता है। अब इतना पैसा भी नहीं बचा है कि लॉक डाउन के बाद घर लौट सकें। माला का कहना है कि लॉक डाउन के बाद स्थिति सुधरेगी तो अपने मित्रों से मदद लेंगी और तब ट्यूशन भी शुरू हो जाएंगे। माला भी तनाव हैं। उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी की परीक्षा देनी है लेकिन तनाव के कारण तैयारी नहीं कर पा रही हैं।
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प्रयागराज में रहकर तैयारी करने वाले अनुराग एवं माला जैसे हजारों प्रतियोगी छात्र-छात्राएं हैं, जो लॉक डाउन में फंसे हुए हैं और उन्हें ढेरों समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से छात्र-छात्राएं खुलकर सामने नहीं आना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर वे सामने आए तो आसपास के लोग ही उनका मजाक उड़ाएंगे। ऐसे छात्र भले ही एक-दूसरे का आर्थिक रूप से सहयोग न कर सकें, लेकिन संकट की इस घड़ी में एक-दूसरे से अपनी समस्याएं साझा कर मन का बोझ हलका कर रहे हैं।
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