{"_id":"5df7dd5e8ebc3e87ed66f687","slug":"how-indifferent-about-such-an-educated-family-s-birth-date-allahabad-news-ald2631629172","type":"story","status":"publish","title_hn":"इतना शिक्षित परिवार जन्मतिथि को लेकर उदासीन कैसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इतना शिक्षित परिवार जन्मतिथि को लेकर उदासीन कैसे
विज्ञापन
प्रयागराज। स्वार से सपा विधायक अब्दुल्ला आजम खान की गलत जन्म तिथि के आधार पर चुनाव लड़ने पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा है कि यह विश्वास करना मुश्कि ल है कि इतना शिक्षित परिवार जो राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय है, इस बात को लेकर कई सालों तक उदासीन रहा कि उनके बेेटे की जन्म तिथि गलत अंकित है। कोर्ट ने कहा कि आजम परिवार ने कई मौकों पर अब्दुल्ला की जन्म तिथि 1993 ही बताई है। ऐसे में अदालत इस बात पर यकीन नहीं कर सकती है कि एक उच्च शिक्षित परिवार को इस बात का एहसास करने में वर्षों लग गए कि उनके बेटे की हाईस्कूल की मार्कशीट में गलत जन्म तिथि अंकित है।
कोर्ट ने कहा कि आजम खां का परिवार कई बार विदेश यात्रा कर चुका है। इसी जन्म तिथि के आधार पर उन्होंने पासपोर्ट और वीजा हासिल किया। 2014 में हासिल किए गए दस्तावेजों में भी जन्म तिथि एक जनवरी 1993 ही अंकित है। यहां तक कि नगर पालिका परिषद रामपुर में पंजीकृत जन्म प्रमाणपत्र में भी एक जनवरी 1993 की तिथि ही अंकित है। कोर्ट ने कहा कि अब्दुल्ला का नया जन्म तिथि प्रमाणपत्र और पुराने प्रमाणपत्र को रद्द करने का आदेश फर्जी है। लखनऊ नगर निगम से बनवाए गए जन्मतिथि प्रमाणपत्र में हेरफेर करने के साक्ष्य स्पष्ट हैं। प्रमाणपत्र में सबसे नीचे बेहद कम स्थान पर अब्दुल्ला की जन्म तिथि अंकित की गई है। जो 30 सितंबर 1990 है। इस पर नगर निगम के किसी अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। किसी उपजिलाधिकारी ने भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे जाहिर है कि यह प्रविष्टि 30 सितंबर 1990 में नहीं की गई है।
विभाग के मंत्री थे आजम खां
कोर्ट ने कहा कि अब्दुल्ला आजम के पिता मो. आजम खां शहरी विकास और स्थानीय निकाय के मंत्री थे। इसी के तहत नगर निगम और नगर पालिका परिषद भी आते हैं। उनके कार्यकाल में ही रामपुर नगर पालिका से पुराना जन्म तिथि प्रमाणपत्र रद्द कर नया प्रमाणपत्र जारी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि आजम खां का परिवार कई बार विदेश यात्रा कर चुका है। इसी जन्म तिथि के आधार पर उन्होंने पासपोर्ट और वीजा हासिल किया। 2014 में हासिल किए गए दस्तावेजों में भी जन्म तिथि एक जनवरी 1993 ही अंकित है। यहां तक कि नगर पालिका परिषद रामपुर में पंजीकृत जन्म प्रमाणपत्र में भी एक जनवरी 1993 की तिथि ही अंकित है। कोर्ट ने कहा कि अब्दुल्ला का नया जन्म तिथि प्रमाणपत्र और पुराने प्रमाणपत्र को रद्द करने का आदेश फर्जी है। लखनऊ नगर निगम से बनवाए गए जन्मतिथि प्रमाणपत्र में हेरफेर करने के साक्ष्य स्पष्ट हैं। प्रमाणपत्र में सबसे नीचे बेहद कम स्थान पर अब्दुल्ला की जन्म तिथि अंकित की गई है। जो 30 सितंबर 1990 है। इस पर नगर निगम के किसी अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। किसी उपजिलाधिकारी ने भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे जाहिर है कि यह प्रविष्टि 30 सितंबर 1990 में नहीं की गई है।
विज्ञापन
विभाग के मंत्री थे आजम खां
कोर्ट ने कहा कि अब्दुल्ला आजम के पिता मो. आजम खां शहरी विकास और स्थानीय निकाय के मंत्री थे। इसी के तहत नगर निगम और नगर पालिका परिषद भी आते हैं। उनके कार्यकाल में ही रामपुर नगर पालिका से पुराना जन्म तिथि प्रमाणपत्र रद्द कर नया प्रमाणपत्र जारी किया गया।
विज्ञापन