पुण्यतिथि पर विशेष : महामना की जिस घर में गूंजी किलकारी, उसे अब राष्ट्रीय स्मारक बनाने की तैयारी
महामना की 150वीं जयंती पर वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने उनके पैतृक आवास को राष्ट्रीय स्मारक बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए कमेटी भी बनाई गई, लेकिन फिर यह योजना अधर में लटक गई। अब एक बार फिर उनके पौत्र ने अहियापुर स्थित घर को स्मारक बनाने की आवाज उठाई है।
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भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय संगमनगरी के अहियापुर स्थित जिस घर में पैदा हुए थे, उसे अब जन्मस्थान स्मारक घोषित कराने की तैयारी है। लंबे समय बाद इसके लिए महामना के परिजन खुद आगे आए हैं। शनिवार को महामना की पुण्यतिथि है। इससे पहले उनके पौत्र न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर उस घर को धरोहर के तौर पर राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए आग्रह किया है।
महामना की 150वीं जयंती पर वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने उनके पैतृक आवास को राष्ट्रीय स्मारक बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए कमेटी भी बनाई गई, लेकिन फिर यह योजना अधर में लटक गई। अब एक बार फिर उनके पौत्र ने अहियापुर स्थित घर को स्मारक बनाने की आवाज उठाई है। शुक्रवार को सीएम को भेजे पत्र में उन्होंने कहा है कि अहियापुर में महामना का जन्मस्थान है।
प्रयागराज आने वाले लोग अक्सर यह जानना चाहते हैं कि महामना इस शहर में किस जगह पैदा हुए थे। ऐसे में अगर इस घर को उनके जन्मस्थान के रूप में मान्यता मिल जाए तो वह हर तरह से उपयुक्त और अच्छा होगा। 25 दिसंबर को महामना की जयंती है। न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने सीएम को संबोधित पत्र में कहा है कि उनका पौत्र होने के नाते मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि अगर उनकी जयंती पर आप खुद प्रयागराज के उस घर में पधारकर उनके जन्मस्थान को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की घोषणा कर दें तो मैं, मेरा परिवार और संपूर्ण प्रयागराजवासी आपके अत्यंत कृतज्ञ होंगे।
मैंने अहियापुर स्थित घर को महामना के जन्मस्थली के रूप में राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। इस मुद्दे पर मैं उनसे मिलना भी चाहता हूं। समय मिलने पर उनसे वार्ता करूंगा। - जस्टिस गिरिधर मालवीय, महामना के पौत्र।
वर्ष 2011 में केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार 150वीं जयंती पर महामना की जन्मस्थली को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने का फैसला ले चुकी है। लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हो सका है। इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजन समिति का गठन भी किया गया था।
परिजन बताते हैं कि तब बीएचयू के चांसलर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. कर्ण सिंह इस समिति के उपाध्यक्ष थे और उन्हें ही कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष का भी जिम्मा दिया गया था। 18 अक्तूबर 2011 को डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में महामना के पैतृक आवास को नेहरू मेमोरियल दिल्ली की तरह विकसित करने का निर्णय लिया गया था। संस्कृति मंत्रालय को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग से मेमोरियल का प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्रदेश सरकार ने स्मारक की स्थापना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दे दिया था। लेकिन, स्मारक नहीं बन सका। महामना के जन्मस्थान को स्मारक बनाने का मुद्दा उठाने वाले पं. देवी दत्त शुक्ल-पं. रमादत्त शुक्ल शोध संस्थान के संयोजक व्रतशील शर्मा बताते हैं कि उनके घर में भगवान कृष्ण-राधा का वह मंदिर अब भी मौजूद है, जिसमें वह पूजा किया करते थे।