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ठठेरी में ठौर, थमा होली का दौर
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 08 Mar 2015 11:24 PM IST
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संगमनगरी की होली की मस्ती का दौर, तीसरे दिन रविवार को ठठेरी बाजार में जमकर हुई होली के साथ थमा। दो दिनों तक रंगों से पूरे शहर को सराबोर करने के बाद होली को ठठेरी बाजार में ठौर मिला। पूरे दिन जमकर रंग बरसा तो क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या युवा सभी एक रंग और एक ही मस्ती में मगन नजर आए। महिलाओं की होली का रंग भी निराला रहा। अबीर गुलाल और ढोल, मंजीरा, नगाड़े की थाप पर रसिया, कबीर के बोलों पर बच्चे, बूढ़े, युवा सभी जमकर नाचे। होलियारों की टोली ने मौज मस्ती के बीच एक दूसरे से गले मिलकर बधाई भी दी।
कई दिन पहल से ही तैयारियां की जा रही थीं। बीच बाजार पानी के टैंकर आ खड़े हुए तो जामा मस्जिद और सब्जीमंडी दोनों मुहानों पर बेंच लगाकर बैरीकेडिंग कर दी गई। किसी ने आवाज लगाई और होलियारों की टोली रंग-गुलाल लेकर घर से निकल पड़ी। फिर तो टैंकरों में रंग घोला गया और रंगों की बौछार हुई। मस्ती और सुरूर होलियारों के सिर चढ़कर बोला। पारंपरिक होली गीतों रसिया, कबीर के साथ ही फिल्मी गीतों ‘रंग बरसे भीगे चुनरवाली’, ‘बलम पिचकारी, जो तूने मुझे मारी’, ‘ये दुनिया पित्तल दी’ जैसे गीतों पर सभी ने जमकर ठुमके लगाए। सभी रंग पर्व होली के उल्लास में सराबोर रहे। नाचते गाते लोगों पर छतों से रंग डालने में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं।
परंपरा के मुताबिक होलिहारों में ले सबसे ज्यादा ‘खाए पिए’ युवकों में से ही दो को चुना गया, जिसमें से एक दूल्हा तो दूसरे को दुल्हन बनाया गया। दूल्हे को कूड़ा गाड़ी में बिठाकर नाचते गाते बारात निकली। श्याम भवन के पास होली की मस्ती के बीच ‘दुल्हन’ ने चिथड़ों से बनी माला वर के गले में डाली। गुझिया पापड़ ठंडई के बीच गले मिलने का दौर शाम तक जारी रहा।
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कई दिन पहल से ही तैयारियां की जा रही थीं। बीच बाजार पानी के टैंकर आ खड़े हुए तो जामा मस्जिद और सब्जीमंडी दोनों मुहानों पर बेंच लगाकर बैरीकेडिंग कर दी गई। किसी ने आवाज लगाई और होलियारों की टोली रंग-गुलाल लेकर घर से निकल पड़ी। फिर तो टैंकरों में रंग घोला गया और रंगों की बौछार हुई। मस्ती और सुरूर होलियारों के सिर चढ़कर बोला। पारंपरिक होली गीतों रसिया, कबीर के साथ ही फिल्मी गीतों ‘रंग बरसे भीगे चुनरवाली’, ‘बलम पिचकारी, जो तूने मुझे मारी’, ‘ये दुनिया पित्तल दी’ जैसे गीतों पर सभी ने जमकर ठुमके लगाए। सभी रंग पर्व होली के उल्लास में सराबोर रहे। नाचते गाते लोगों पर छतों से रंग डालने में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं।
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परंपरा के मुताबिक होलिहारों में ले सबसे ज्यादा ‘खाए पिए’ युवकों में से ही दो को चुना गया, जिसमें से एक दूल्हा तो दूसरे को दुल्हन बनाया गया। दूल्हे को कूड़ा गाड़ी में बिठाकर नाचते गाते बारात निकली। श्याम भवन के पास होली की मस्ती के बीच ‘दुल्हन’ ने चिथड़ों से बनी माला वर के गले में डाली। गुझिया पापड़ ठंडई के बीच गले मिलने का दौर शाम तक जारी रहा।
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