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हिंदी के अनन्य सेवक थे राजर्षि टंडन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 02 Aug 2016 01:48 AM IST
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राजर्षि टंडन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन को 135वीं जयंती पर सोमवार को विभिन्न संगठनों की ओर से उन्हें याद किया गया। खत्री सभा प्रयाग की ओर से कल्याणी देवी से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। फूलों से सजे रथ पर राजर्षि टंडन के चित्र के साथ आकर्षक झांकी निकाली गई। यात्रा में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी बैंड-बाजा के साथ राजर्षि टंडन अमर रहें के जयघोष के साथ चले। शोभायात्रा में शामिल लोगों ने अपने हाथों में राजर्षि टंडन का चित्र ले रखा था।
यात्रा के समापन पर लाजपत शिशु विहार में जुटे बच्चों को उपहार बांटे गए। संयोजक बृजेश मेहरोत्रा की अगुवाई में निकली यात्रा में सह संयोजक अनिल टंडन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामजी कपूर, महामंत्री नीरज मेहरोत्रा, सतीश टंडन, दीपक मेहरोत्रा, अतुल, श्यामजी कपूर, अजीत, अशोक चड्ढा आदि शामिल थे। इससे पहले खत्री सभा प्रयाग की ओर से अतरसुइया स्थित उनके आवास पर स्मृति सभा में जुटे लोगों ने हिन्दी और राष्ट्र के लिए उनकी सेवाओं को याद किया तो उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया। सभा अध्यक्ष राकेश चड्ढा समेत अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
लोक सेवक मंडल की ओर से राजर्षि टंडन सेवा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहा, राजर्षि टंडन सादगी, त्याग, समर्पण के धनी थे, इसीलिए राजर्षि कहलाए। आज भारत दुनिया में संपूर्ण प्रभुता संपन्न, लोकतांत्रिक गणराज्य बना है तो यह राजर्षि जैसे महापुरुष के संघर्ष का ही परिणाम है। विशिष्ट अतिथि प्रो.उमाकांत यादव ने कहा, राजर्षि टंडन ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने में हिंदी साहित्य सम्मेलन के माध्यम से अथक प्रयास किया। युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार चोपड़ा, कुंवर जी टंडन, हरिगोविंद और ओमप्रकाश शुक्ल ने भी उन्हें याद किया। अतिथियों का स्वागत डॉ.रमा सिंह और धन्यवाद डॉ.इला मालवीय ने किया। इससे पहले कल्याणी देवी लोक सेवक मंडल से प्रभातफेरी भी निकाली गई।
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खत्री सभा प्रयाग और हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से सम्मेलन संग्रहालय में ‘सम्मेलन के प्राण’ विषयक संगोष्ठी में राजर्षि टंडन को याद करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा, किसी भी मुद्दे के समाधान के लिए आत्ममंथन जरूरी है। सिर्फ कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होने वाला, लोगों का दृष्टिकोण भी व्यवहारिक हो। राजर्षि टंडन ने जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर ध्यान दिया था। चाहे वह देश की आजादी का सवाल रहा हो, या फिर भाषा का।
वहीं महापौर अभिलाषा गुप्ता की लाचारगी पर सभी हैरत मेें रहे। उन्होंने राजर्षि टंडन मंडपम के पास कूड़ाघर हटाने का मुद्दा उठाया। कहा, मंडपम् के पास कूड़ाघर दुर्भाग्यपूर्ण है, इसे यहां से हटवाने के लिए प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासा, राकेश चड्ढा, सम्मेलन के प्रधानमंत्री विभूति मिश्र, डॉ.रामकिशोर शर्मा,हरिमोहन मालवीय आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन सहायक मंत्री श्यामकृष्ण पांडेय ने किया। कार्यक्रम में शेषमणि पांडेय, सूर्य नारायण, बृजेश मेहरोत्रा, अनिल टंडन आदि मौजूद थे।
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यात्रा के समापन पर लाजपत शिशु विहार में जुटे बच्चों को उपहार बांटे गए। संयोजक बृजेश मेहरोत्रा की अगुवाई में निकली यात्रा में सह संयोजक अनिल टंडन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामजी कपूर, महामंत्री नीरज मेहरोत्रा, सतीश टंडन, दीपक मेहरोत्रा, अतुल, श्यामजी कपूर, अजीत, अशोक चड्ढा आदि शामिल थे। इससे पहले खत्री सभा प्रयाग की ओर से अतरसुइया स्थित उनके आवास पर स्मृति सभा में जुटे लोगों ने हिन्दी और राष्ट्र के लिए उनकी सेवाओं को याद किया तो उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया। सभा अध्यक्ष राकेश चड्ढा समेत अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
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लोक सेवक मंडल की ओर से राजर्षि टंडन सेवा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहा, राजर्षि टंडन सादगी, त्याग, समर्पण के धनी थे, इसीलिए राजर्षि कहलाए। आज भारत दुनिया में संपूर्ण प्रभुता संपन्न, लोकतांत्रिक गणराज्य बना है तो यह राजर्षि जैसे महापुरुष के संघर्ष का ही परिणाम है। विशिष्ट अतिथि प्रो.उमाकांत यादव ने कहा, राजर्षि टंडन ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने में हिंदी साहित्य सम्मेलन के माध्यम से अथक प्रयास किया। युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार चोपड़ा, कुंवर जी टंडन, हरिगोविंद और ओमप्रकाश शुक्ल ने भी उन्हें याद किया। अतिथियों का स्वागत डॉ.रमा सिंह और धन्यवाद डॉ.इला मालवीय ने किया। इससे पहले कल्याणी देवी लोक सेवक मंडल से प्रभातफेरी भी निकाली गई।
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खत्री सभा प्रयाग और हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से सम्मेलन संग्रहालय में ‘सम्मेलन के प्राण’ विषयक संगोष्ठी में राजर्षि टंडन को याद करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा, किसी भी मुद्दे के समाधान के लिए आत्ममंथन जरूरी है। सिर्फ कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होने वाला, लोगों का दृष्टिकोण भी व्यवहारिक हो। राजर्षि टंडन ने जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर ध्यान दिया था। चाहे वह देश की आजादी का सवाल रहा हो, या फिर भाषा का।
वहीं महापौर अभिलाषा गुप्ता की लाचारगी पर सभी हैरत मेें रहे। उन्होंने राजर्षि टंडन मंडपम के पास कूड़ाघर हटाने का मुद्दा उठाया। कहा, मंडपम् के पास कूड़ाघर दुर्भाग्यपूर्ण है, इसे यहां से हटवाने के लिए प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासा, राकेश चड्ढा, सम्मेलन के प्रधानमंत्री विभूति मिश्र, डॉ.रामकिशोर शर्मा,हरिमोहन मालवीय आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन सहायक मंत्री श्यामकृष्ण पांडेय ने किया। कार्यक्रम में शेषमणि पांडेय, सूर्य नारायण, बृजेश मेहरोत्रा, अनिल टंडन आदि मौजूद थे।