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उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति रद्द
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 23 Sep 2015 01:21 AM IST
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इलाहाबाद। उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग के तीन सदस्यों की नियुक्तियां रद्द कर चुके इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार को एक और झटका दिया है। कोर्ट ने हाल ही में नियुक्त आयोग के अध्यक्ष लाल बिहारी पांडेय की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए उनका चयन रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अध्यक्ष की नियुक्ति में न तो किसी प्रक्रिया का पालन किया गया है और न ही वह अध्यक्ष पद की योग्यता रखते हैं। अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए अधिकार पृच्छा याचिका जारी करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि इनके कार्यकाल के दौरान आयोग द्वारा किए गए चयन पर इस आदेश का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
रूलर एंड अर्बन डेवलपमेंट एसोसिएशन ने जनहित याचिका दाखिल कर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी लाल बिहारी पांडेय की उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। याची के वकील जीके सिंह और अतुल गुप्ता का कहना था कि अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए किसी चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दूसरे लाल बिहारी अध्यक्ष के पद पर नियुक्त होने की योग्यता नहीं रखते हैं क्योंकि इस पद पर नियुक्ति के लिए आईएएस कैडर का सचिव रैंक का अधिकारी होना चाहिए। लाल बिहारी पीसीएस संवर्ग से प्रोन्नत होकर आईएएस बने और जिलाधिकारी के पद से रिटायर हो गए। वह कभी भी सचिव रैंक पर नहीं रहे।
प्रदेश सरकार नियुक्ति की प्रक्रिया के सवाल पर मौन थी मगर योग्यता के प्रश्न पर उसकी दलील थी कि लालबिहारी सुपर टाइम स्केल पर प्रोन्नति पा चुके हैं जो कि सचिव रैंक के समकक्ष है। इस विधिक प्रश्न का जवाब देते हुए खंडपीठ ने कहा मात्र सुपर टाइम स्केल के आधार पर डीएम के पद को सचिव रैंक का नहीं माना जा सकता है। सचिव के पद के समकक्ष का निर्धारण करने के लिए क्षेत्राधिकार, कार्य की प्रकृति, अधिकारी को प्रदत्त अधिकार, न्यूनतम योग्यता और वेतन को मिलाकर किया जाएगा। इसमें से वेतन अंतिम अर्हता है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता था कि सुपर टाइम स्केल पाने वाला डीएम रैंक का अधिकारी सचिव रैंक के समकक्ष है।
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कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए अध्यक्ष की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि नए सिरे चयन प्रक्रिया का प्रारंभ योग्य व्यक्ति की नियुक्ति की प्रक्रिया का प्रारंभ की जाए।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के सदस्य और अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की अर्हता आयोग के एक्ट 1981 के सेक्शन 4(2)(ब) में दी गई है। इसके अनुसार आयोग में कम से कम दो और अधिक से अधिक छह सदस्य हो सकते हैं। अध्यक्ष पद पर उच्च न्यायिक सेवा कैडर का अधिकारी यानी जिला जज या उसके समकक्ष, आईएएस कैडर में सचिव या उसके समकक्ष, कुलपति, किसी विश्वविद्यालय का प्रोफेसर या शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि रखने वाले व्यक्ति को बनाया जा सकता है। सरकार ने 15 जुलाई 2015 को अधिसूचना जारी कर लालबिहारी पांडेय को आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने आयोग के सदस्य डा. रामवीर यादव, ऊदल यादव और अनिल सिंह की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था।
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रूलर एंड अर्बन डेवलपमेंट एसोसिएशन ने जनहित याचिका दाखिल कर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी लाल बिहारी पांडेय की उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। याची के वकील जीके सिंह और अतुल गुप्ता का कहना था कि अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए किसी चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दूसरे लाल बिहारी अध्यक्ष के पद पर नियुक्त होने की योग्यता नहीं रखते हैं क्योंकि इस पद पर नियुक्ति के लिए आईएएस कैडर का सचिव रैंक का अधिकारी होना चाहिए। लाल बिहारी पीसीएस संवर्ग से प्रोन्नत होकर आईएएस बने और जिलाधिकारी के पद से रिटायर हो गए। वह कभी भी सचिव रैंक पर नहीं रहे।
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प्रदेश सरकार नियुक्ति की प्रक्रिया के सवाल पर मौन थी मगर योग्यता के प्रश्न पर उसकी दलील थी कि लालबिहारी सुपर टाइम स्केल पर प्रोन्नति पा चुके हैं जो कि सचिव रैंक के समकक्ष है। इस विधिक प्रश्न का जवाब देते हुए खंडपीठ ने कहा मात्र सुपर टाइम स्केल के आधार पर डीएम के पद को सचिव रैंक का नहीं माना जा सकता है। सचिव के पद के समकक्ष का निर्धारण करने के लिए क्षेत्राधिकार, कार्य की प्रकृति, अधिकारी को प्रदत्त अधिकार, न्यूनतम योग्यता और वेतन को मिलाकर किया जाएगा। इसमें से वेतन अंतिम अर्हता है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता था कि सुपर टाइम स्केल पाने वाला डीएम रैंक का अधिकारी सचिव रैंक के समकक्ष है।
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कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए अध्यक्ष की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि नए सिरे चयन प्रक्रिया का प्रारंभ योग्य व्यक्ति की नियुक्ति की प्रक्रिया का प्रारंभ की जाए।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के सदस्य और अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की अर्हता आयोग के एक्ट 1981 के सेक्शन 4(2)(ब) में दी गई है। इसके अनुसार आयोग में कम से कम दो और अधिक से अधिक छह सदस्य हो सकते हैं। अध्यक्ष पद पर उच्च न्यायिक सेवा कैडर का अधिकारी यानी जिला जज या उसके समकक्ष, आईएएस कैडर में सचिव या उसके समकक्ष, कुलपति, किसी विश्वविद्यालय का प्रोफेसर या शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि रखने वाले व्यक्ति को बनाया जा सकता है। सरकार ने 15 जुलाई 2015 को अधिसूचना जारी कर लालबिहारी पांडेय को आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने आयोग के सदस्य डा. रामवीर यादव, ऊदल यादव और अनिल सिंह की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था।