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हाईकोर्ट ने एक साथ निपटाई साढ़े पांच सौ याचिकाएं
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हाईकोर्ट ने एक साथ निपटाईं
साढ़े पांच सौ याचिकाएं
गिरफ्तारी पर रोक की मांग को लेकर याचिका दाखिल करने वाले दें अग्रिम जमानत अर्जी
प्रयागराज। सूबे में अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली बार आपराधिक मामलों में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल लगभग साढ़े पांच सौ याचिकाओं को एक ही दिन में निस्तारित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अब याचीगण के पास अग्रिम जमानत हेतु आवेदन करने का विकल्प उपलब्ध है। कोर्ट ने प्राथमिकी पर हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचीगण से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत के लिए अधीनस्थ न्यायालय में दो सप्ताह के भीतर अर्जी दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस दौरान इन सभी की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है।
हेमंत राय उर्फ सौरभ दुबे सहित करीब साढ़े पांच आपराधिक याचिकाएं मंगलवार को मुख्य न्यायमूर्ति की कोर्ट में सूचीबद्ध थीं। कोर्ट ने कहा है कि प्राथमिकी के आरोपों को देखते हुए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। जब कोर्ट ने मुख्य मांग स्वीकार नहीं की तो अन्य पर निर्देश देना उचित नहीं रहेगा। याची को अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने का वैकल्पिक फोरम उपलब्ध है। यदि वह अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करता है तो 25 जुलाई तक गिरफ्तारी न की जाए ।
गौरतलब है कि अब तक प्रदेश में अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान लागू न होने के कारण गिरफ्तारी पर रोक लगाने और प्राथमिकी के विरुद्ध हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में आपराधिक याचिकाएं दाखिल होती रही हैं। मगर अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू होने के बाद अब गिरफ्तारी पर रोक के लिए याचिका का औचित्य नहीं रह गया है। हालांकि प्राथमिकी को चुनौती देने के लिए अब भी आपराधिक याचिका ही दाखिल होगी।
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साढ़े पांच सौ याचिकाएं
गिरफ्तारी पर रोक की मांग को लेकर याचिका दाखिल करने वाले दें अग्रिम जमानत अर्जी
प्रयागराज। सूबे में अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली बार आपराधिक मामलों में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल लगभग साढ़े पांच सौ याचिकाओं को एक ही दिन में निस्तारित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अब याचीगण के पास अग्रिम जमानत हेतु आवेदन करने का विकल्प उपलब्ध है। कोर्ट ने प्राथमिकी पर हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचीगण से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत के लिए अधीनस्थ न्यायालय में दो सप्ताह के भीतर अर्जी दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस दौरान इन सभी की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है।
हेमंत राय उर्फ सौरभ दुबे सहित करीब साढ़े पांच आपराधिक याचिकाएं मंगलवार को मुख्य न्यायमूर्ति की कोर्ट में सूचीबद्ध थीं। कोर्ट ने कहा है कि प्राथमिकी के आरोपों को देखते हुए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। जब कोर्ट ने मुख्य मांग स्वीकार नहीं की तो अन्य पर निर्देश देना उचित नहीं रहेगा। याची को अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने का वैकल्पिक फोरम उपलब्ध है। यदि वह अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करता है तो 25 जुलाई तक गिरफ्तारी न की जाए ।
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गौरतलब है कि अब तक प्रदेश में अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान लागू न होने के कारण गिरफ्तारी पर रोक लगाने और प्राथमिकी के विरुद्ध हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में आपराधिक याचिकाएं दाखिल होती रही हैं। मगर अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू होने के बाद अब गिरफ्तारी पर रोक के लिए याचिका का औचित्य नहीं रह गया है। हालांकि प्राथमिकी को चुनौती देने के लिए अब भी आपराधिक याचिका ही दाखिल होगी।
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