{"_id":"5cd718bdbdec220756711a41","slug":"highcourt-can-t-use-it-s-power-for-personel-use","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यक्तिगत अधिकार के लिए हाईकोर्ट नहीं प्रयोग कर सकता अपनी शक्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यक्तिगत अधिकार के लिए हाईकोर्ट नहीं प्रयोग कर सकता अपनी शक्ति
Sun, 12 May 2019 12:18 AM IST
विनोद सिंह
Prayagraj
Prayagraj
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 12 May 2019 12:18 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुच्छेद 226 से संविधान ने हाई कोर्ट को असामान्य शक्ति दी है इसका इस्तेमाल पक्षकारों के व्यक्तिगत अधिकारों को तय करने के लिए नहीं किया जा सकता। संविदा का पालन कराने के लिए सिविल कोर्ट में वाद दायर किया जा सकता है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में 936 सी सी टी वी कैमरे सहित लखनऊ में आग से हुई छति की भरपाई करते हुए भुगतान करने का समादेश जारी करने के मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और कहा कि याची सिविल वाद दायर कर सकता है।कोर्ट ने याचिका की पोषणीयता पर की गई राज्य सरकार की आपत्ति को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति पीके जायसवाल तथा न्यायमूर्ति डॉ वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मेसर्स आईपी जैकेट टेक्नालॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर दिया है।याचिका पर उ प्र राजकीय निर्माण निगम के अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने प्रतिवाद किया। याची का तर्क था कि संविदा को लेकर याचिका दाखिल करने पर पूर्णतया प्रतिबंध नहीं है। कोर्ट ऐसी याचिका की सुनवाई कर सकती है किन्तु कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सूर्या कंस्ट्रक्शन केस के फैसले को इस मामले से अलग माना और याचिका खारिज कर दी है।
विज्ञापन