{"_id":"6a09acd6b529454f3f069e82","slug":"high-court-words-like-fraud-and-deceit-cannot-make-a-civil-dispute-criminal-2026-05-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : धोखाधड़ी और छल जैसे शब्दों से दीवानी विवाद को नहीं बना सकते आपराधिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : धोखाधड़ी और छल जैसे शब्दों से दीवानी विवाद को नहीं बना सकते आपराधिक
Sun, 17 May 2026 05:26 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 17 May 2026 05:26 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल धोखाधड़ी या छल जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से कोई दीवानी (सिविल) विवाद आपराधिक मामला नहीं बन जाता। व्यावसायिक समझौतों में भुगतान के विवाद विशुद्ध रूप से सिविल कोर्ट के दायरे में आते हैं।
विज्ञापन
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल धोखाधड़ी या छल जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से कोई दीवानी (सिविल) विवाद आपराधिक मामला नहीं बन जाता। व्यावसायिक समझौतों में भुगतान के विवाद विशुद्ध रूप से सिविल कोर्ट के दायरे में आते हैं। इनके लिए पुलिस या आपराधिक अदालतों का शॉर्टकट रास्ता अपनाना कानून का दुरुपयोग है।
विज्ञापन
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने चीन की कंपनी के मालिक हे हाओमिन के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर में चल रही आपराधिक कार्यवाही और चार्जशीट रद्द कर दी। मामला गौतमबुद्ध नगर के दादरी थाना क्षेत्र का है। विवाद दो कंपनियों के बीच प्लांट स्थापना के अनुबंध से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 1.40 करोड़ रुपये के काम में से केवल 42 लाख रुपये का आंशिक भुगतान किया गया और शेष 98 लाख रुपये नहीं दिए गए।
विज्ञापन
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को भी दी नसीहत
हाईकोर्ट ने पाया कि आंशिक भुगतान किया गया था। इसलिए शुरुआत से ही धोखा देने की मंशा साबित नहीं होती। महज बाद में भुगतान न करना अनुबंध का उल्लंघन है, धोखाधड़ी नहीं। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को भी नसीहत दी कि मजिस्ट्रेट को मूकदर्शक बनकर समन जारी नहीं करना चाहिए, बल्कि विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। शिकायतकर्ता बकाया धन की वसूली के लिए दीवानी अदालत या मध्यस्थता का सहारा ले सकता है।
विज्ञापन