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हाईकोर्ट : जब हथियार के दुरुपयोग के सबूत नहीं तो लाइसेंस निरस्त करना जरूरी नहीं
Thu, 24 Feb 2022 09:46 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 24 Feb 2022 09:46 AM IST
सार
पिछले 22 साल से लाइसेंस निरस्त करने के आदेश पर रोक लगी है। इसके दुरुपयोग का सबूत नहीं तो लाइसेंस निरस्त करना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने यह आदेश याची सुधाकर मिश्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : Social Media
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शस्त्र का दुरुपयोग नहीं किया गया है तो केवल आपराधिक केस दर्ज होने की वजह से शस्त्र लाइसेंस निरस्त करना मनमाना व विधि विरुद्ध है। कोर्ट ने कहा कि दो परिवारों की दुश्मनी के चलते दोनों तरफ से कई लोगों की हत्या की जा चुकी है। ऐसे में अब भी जीवन को खतरा बरकरार है।
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पिछले 22 साल से लाइसेंस निरस्त करने के आदेश पर रोक लगी है। इसके दुरुपयोग का सबूत नहीं तो लाइसेंस निरस्त करना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने यह आदेश याची सुधाकर मिश्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी द्वारा शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने व मंडलायुक्त द्वारा अपील खारिज करने के आदेशों को रद कर दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि 18 मई 1989 को आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण याची का शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। आयुक्त वाराणसी ने इसके खिलाफ अपील भी खारिज कर दी। याची के भाई दिवाकर मिश्र का भी शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया गया था।
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