हाईकोर्ट, कुंभ मेला को भी किया नजरअंदाज
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एशिया का सबसे बड़ा इलाहाबाद हाईकोर्ट, हर छह और बारह वर्ष में संगम तट पर अर्द्धकुंभ एवं महाकुंभ में बसने वाला शहर और उसमें देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालु, अक्षयवट, सात प्रधानमंत्री देने के साथ धार्मिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी की श्रेणी में न रखना आश्चर्यजनक है। यह कहना है कि वरिष्ठ अधिवक्ता शरद चंद्र मिश्रा का। श्री मिश्रा समेत बड़ी संख्या में शहरी केंद्र सरकार के इस फैसले से आहत हैं। स्मार्ट सिटी के चयन में इलाहाबाद को बाहर करने पर शनिवार को भी विरोध का क्रम जारी रहा।
श्री मिश्रा ने प्रधानमंत्री से दूसरी सूची में इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने का अनुरोध किया है। इस संबंध में उन्होंने पीएम को ई-मेल एवं व्हाट्सएप भी किया है। उन्होंने कहा है कि सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री को अपनी करनी और कथनी में भेदभाव नहीं करना चाहिए। ऐसे पवित्र धार्मिक एवं राजनीतिक शहर को स्मार्ट सिटी की श्रेणी में न रखना पूरे देश का अपमान है। उधर, समाजवादी छात्र सभा की चंद्रशेखर आजाद पार्क में हुई बैठक में कहा गया कि जिसे प्रदेश की उप राजधानी के रूप में जाना जाता है, जहां विश्वविख्यात कुंभ मेला लगता है और पूर्व का ऑक्सफोर्ड कहा जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय है, भाजपा सरकार ने उसके साथ सौतेला व्यवहार कर स्मार्ट सिटी के सपने को चकनाचूर कर दिया।
सभा के जिला उपाध्यक्ष फैसल मंसूर ने कहा कि इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए विश्वविद्यालय के नौजवान सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे और केंद्र सरकार को मजबूर करेंगे। अगर दस दिन के अंदर केंद्र ने इस पर पुन: विचार नहीं करती तो आंदोलन शुरू होगा। बैठक का संचालन सुदीश कुमार गौड़, सदाकत खान, तमजीद अशरफ, प्रिंस यादव, मोहम्मद अल्फी, सैयद समी, सचिन, अजीत यादव, डीपी यादव आदि मौजूद थे।