फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court Validity of arrest can be challenged despite bail rejection.

High Court : जमानत खारिज होने के बावजूद गिरफ्तारी की वैधता को दे सकते हैं चुनौती

Wed, 05 Aug 2026 07:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Aug 2026 07:38 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज हो जाने मात्र से उसे अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। जमानत की मांग और गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देना अलग-अलग व स्वतंत्र कानूनी अधिकार हैं। 

विज्ञापन
High Court Validity of arrest can be challenged despite bail rejection.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज हो जाने मात्र से उसे अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। जमानत की मांग और गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देना अलग-अलग व स्वतंत्र कानूनी अधिकार हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इनमें से एक उपाय अपनाने से दूसरे का अधिकार समाप्त नहीं होता। यदि गिरफ्तारी संविधान और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं की गई है तो उसकी वैधता पर अलग से न्यायिक परीक्षण कराया जा सकता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने संभल निवासी राकेश की याचिका पर की।

विज्ञापन

याची के खिलाफ गुन्नौर थाने में अपहरण, अवैध रूप से बंधक बनाने, दुष्कर्म, मानव तस्करी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज है। याचिका में आरोपी ने अपनी गिरफ्तारी और उसके आधार पर पारित रिमांड आदेश को चुनौती दी थी। उसका कहना था कि गिरफ्तारी के समय उसे अनुच्छेद 22(1) के अनुरूप गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी नहीं दी गई।

विज्ञापन

याची ने कहा जमानत निरस्त हो चुकी है, लेकिन इससे गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने का उसका अधिकार प्रभावित नहीं होता। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि इस प्रकार की याचिका का उद्देश्य जमानत प्राप्त करना नहीं, बल्कि यह जांचना है कि गिरफ्तारी कानूनन वैध थी या नहीं। यदि गिरफ्तारी शुरू से ही अवैध पाई जाती है तो पहले उसकी जमानत खारिज होने के आधार पर उसे राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी की वैधता की जांच का दायरा जमानत याचिका से अलग है। इसमें सिर्फ यह देखा जाता है कि गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 22(1) व बीएनएसएस में निहित अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए की गई या नहीं। इसलिए जमानत संबंधी कार्यवाही और गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने की कार्यवाही को एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed